महाराष्ट्र में पहली बार डिजिटल स्व-सहभागिता के साथ 2027 जनगणना
महाराष्ट्र में 2027 की जनगणना बहु-चरणीय प्रक्रिया के रूप में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहली बार डिजिटल भागीदारी को प्रमुखता दी गई है। यह प्रक्रिया महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर 1 मई से आरंभ होगी, और प्रारंभिक चरण में नागरिकों द्वारा स्व-सहभागिता के माध्यम से अपने परिवार की सूचना ऑनलाइन जमा करने की व्यवस्था होगी। यह प्लेटफॉर्म भारतीय जनगणना विभाग की देखरेख में विकसित किया गया है।
डिजिटल स्व-सहभागिता की सुविधा लगभग दो सप्ताह तक खुली रहेगी, जिसके बाद व्यापक क्षेत्रीय सर्वेक्षण अभियान शुरू किया जाएगा। 16 मई से लगभग 2,64,000 प्रशिक्षित गणक एवं पर्यवेक्षक पूरे महाराष्ट्र में तैनात होंगे ताकि हर घर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। जनगणना का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जातिगत डेटा संग्रह को शामिल किया जाएगा।
यह पहल जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कही जा रही है, जहां नागरिक स्वतंत्र रूप से अपने डेटा जमा कर सकेंगे। केवल एक सदस्य को ही परिवार की जानकारी भरनी होगी, जिससे भागीदारी सरल होगी। डिजिटल फॉर्म में 33 प्रश्न शामिल हैं, जो आवासीय स्थिति, घर के सुविधाओं, जनसांख्यिकीय संरचना और मूलभूत सेवाओं तक पहुंच संबंधी विस्तृत जानकारी एकत्रित करेंगे।
डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। सभी सूचनाएं एन्क्रिप्टेड कर के सुरक्षित सरकारी सर्वर पर संग्रहित की जाएंगी। इस डाटा का उपयोग जांच या कानूनी मामलों के लिए नहीं होगा और यह सूचना के अधिकार जैसे कानूनों के दायरे से बाहर रहेगा। यह भरोसा नागरिकों में व्यापक सहभागिता और विश्वास बढ़ाने के लिए दिया गया है। प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु स्व-सहभागिता पहचान (SE ID) आवश्यक होगी, जिसे पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल से बनाया जा सकेगा। इस चरण में कोई दस्तावेज़ अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन इनपुट की सत्यता के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा SE ID का प्रयोग किया जाएगा।
जनगणना के संचालन के लिए पूरी तैयारी भी सुनिश्चित की गई है। गणक और पर्यवेक्षकों को पाँच स्तरों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से होकर गुजरना पड़ा है, जिससे डेटा संग्रह की सटीकता, स्थिरता और कुशलता सुनिश्चित हो सके। संपूर्ण रूप से 2027 की महाराष्ट्र जनगणना एक मिश्रित मॉडल है, जो डिजिटल स्व-रिपोर्टिंग और पारंपरिक क्षेत्रीय सत्यापन को संयोजित करती है। यह दृष्टिकोण डेटा की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ नागरिकों की सुविधा में भी सुधार करेगा, और भारत में जनसंख्या डेटा संग्रह की प्रक्रिया में एक उल्लेखनीय विकास साबित होगा।