थोड़ी देर बाद उन्हें वॉट्सएप पर एक अनजान नंबर से कॉल आई और वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया। पीड़ित को बताया गया कि उनके नाम पर दिल्ली क्राइम ब्रांच में केस दर्ज है जिसकी जांच में उन्हें पुलिस की मदद करनी पड़ेगी। इसके बाद जालसाजों ने उनसे कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट कर लिए गए है। बातचीत के दौरान जालसाजों ने कहा कि अगर मनी लॉंन्ड्रंग केस से बचना है तो एक पत्र भेजना होगा। इस पत्र में लिखना है कि उनका डेबिड कार्ड कहीं खो गया है और वह इस मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल नहीं हैं। पीड़ित ने ठग की बात मानकर पत्र भेज दिया। आरोपी प्रदीप सावंत ने 1 दिसंबर को पीड़ित को ऑनलाइन ही फर्जी कोर्ट में पेशी कर बयान दर्ज कराया।
फर्जी कोर्ट में पेश कर तुड़वाई एफडी और दस्तावेज की जानकारी ली
पीड़ित के मुताबिक विडियो में जज के वेशभूषा में एक व्यक्ति बैठा था। साथ ही वकील बहस कर रहा था। इसके बाद पीड़ित के ऊपर ऑनलाइन ही कई आरोप लगाकर बैंक अकाउंट की जांच करने की बात कही गई। फर्जी जज ने पीड़ित को धमकी देकर बैंक से फंड, एफडी, एमएफ के सारे खातों से रुपये वेरिफाई कराने की बात कही। पीड़ित ने तुरंत 2 लाख की एफडी तोड़कर ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। फिर फर्जी पुलिस वालों ने दोबारा 4 दिसंबर को कॉल कर उनसे 10 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी जब 6 दिसंबर को ठग तीसरी बार कॉल कर म्युचुअल फंड का अकाउंट बंद कर और रुपये मांगने लगे तो उन्हें ठगी के बारे में शक हुआ। तब पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की। एडीसीपी साइबर शैव्या गोयल का कहना है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है।

