जर्मनी के कुत्तों को दून की ठंड रास नहीं आई। किसी जर्मन शेफर्ड को एसी तो किसी को पंखे की हवा में रखा गया। दरअसल, जर्मनी में काफी ठंड होती है। दिसंबर से फरवरी के बीच में वहां का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री के आसपास रहता है, जिससे कड़ाके की ठंड होती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन का सीधा असर इन नस्ल के कुत्तों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। आठ कुत्तों को कुछ समय पहले ही जर्मनी से भारत इम्पोर्ट किया गया। डॉग शो में दून पहुंचे इन जर्मन शेफर्ड को एसी तो किसी को पंखे में रखा गया
उतराखंड: शनिवार को डॉग शो आयोजित हुआ डॉग शो में पहुंचे आठ विदेशी जर्मन शेफर्ड पहुंचे
जर्मनी के कुत्तों को दून की ठंड रास नहीं आई। किसी जर्मन शेफर्ड को एसी तो किसी को पंखे की हवा में रखा गया। दरअसल, जर्मनी में काफी ठंड होती है। दिसंबर से फरवरी के बीच में वहां का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री के आसपास रहता है, जिससे कड़ाके की ठंड होती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन का सीधा असर इन नस्ल के कुत्तों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। आठ कुत्तों को कुछ समय पहले ही जर्मनी से भारत इम्पोर्ट किया गया। डॉग शो में दून पहुंचे इन जर्मन शेफर्ड को एसी तो किसी को पंखे में रखा गया

