इबोला प्रकोप: ऐतिहासिक तीव्रता पर वैश्विक प्रतिक्रिया की उम्मीद
24 अप्रैल को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में दुर्लभ बंटीबुज्यो स्ट्रेन के इबोला वायरस का पहला संभावित मामला सामने आया। 17 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया।
मई 27 तक, यह इबोला प्रकोप दुनिया के इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा साबित हुआ है, जिसमें सिर्फ डीआरसी में 906 संदिग्ध मामले और 223 मौतें दर्ज की गई हैं।
यह वायरस अब अन्य महाद्वीपों तक फैलने की आशंका जताई जा रही है। इटली में एक संदिग्ध मामलें की जांच चल रही है, और ब्राजील में दो संभावित मामले सामने आए हैं। ये सभी या तो डीआरसी या युगांडा से लौटे यात्रियों से जुड़े हुए माने जा रहे हैं। अमेरिका के एक व्यक्ति में इबोला पॉजिटिव पाया गया है, जिन्हें फिलहाल जर्मनी में उपचार प्रदान किया जा रहा है।
इस बढ़ती चिंता के बीच, महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन ने बंण्डीबुज्यो स्ट्रेन के लिए तीन संभावित टीकों के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए 86 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक की धनराशि आवंटित की है।
इबोला: एक घातक वायरस
इबोला एक दुर्लभ लेकिन घातक वायरस है, जो मुख्यतया संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे रक्त, मल और उल्टी के सीधे संपर्क से फैलता है।
इबोला के प्रारंभिक लक्षणों में गले में खराश, सिरदर्द, बुखार, थकान और शरीर में दर्द शामिल हैं। गंभीर मामलों में त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द और दौरे आ सकते हैं।
इबोला वायरस सर्वप्रथम 1976 में पहचाना गया था, और तब से यह विभिन्न अफ्रीकी क्षेत्रों में समय-समय पर प्रकोपों का कारण बना है। इस वायरस से मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय प्रयासरत है कि तेजी से नियंत्रण और टीकाकरण के माध्यम से इसकी फैलावट को रोका जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेज़ और समन्वित कार्रवाई की जाती है, तो इस प्रकोप को गंभीर वैश्विक आपदा बनने से रोका जा सकता है। फिलहाल सतर्कता और संक्रमण नियंत्रण सर्वोपरि है।
इबोला की वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संक्रमण के प्रसार को सीमित किया जा रहा है।