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गाजियाबाद: आईबी अधिकारी बन मांगी 15 करोड़ की रंगदारी

गाजियाबाद में पुलिस और स्वॉट टीम ने खुद को आईबी से सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक बताकर अवैध वसूली करने वाले अनिल प्रताप सिंह को उसके दो साथियों सहित गिरफ्तार किया है। जांच पड़ताल में पता चला कि आरोपी आईबी से संयुक्त उपनिदेशक के पद से वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुआ है। पुलिस ने उनके कब्जे से एक लाख 92 हजार रुपये, तीन मोबाइल फोन और एक डायरी बरामद की है। यह गिरफ्तारी 2 सितंबर 2026 को की गई। अभियुक्तों पर एक फर्म मालिक से 15 करोड़ की रंगदारी मांगने और 55 लाख रुपये रुपये वसूलने का आरोप है।

डीसीपी ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने बताया कि इंदिरापुरम में रहने वाले उद्यमी विकास मित्तल ने एक सितंबर 2026 को तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि अनिल प्रताप सिंह, अनिकेत सिंह उर्फ कबीर सिंह, सिद्धार्थ जैन, सलमान और अंकित द्विवेदी ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताया। 15 करोड़ रुपये की मांग की। इसके बाद पांच करोड़ रुपये में सहमति बनी। आरोपियों ने उद्यमी से 55 लाख रुपये भी वसूल लिए। फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। टीम ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पंचशील हाईनेस सोसायटी में रहने वाले अनिल प्रताप सिंह(64), दिल्ली के वसंतकुंज में रहने वाले अंकित द्विवेदी और दिल्ली के ही जेपी ब्लॉक पीतमपुरा में रहने वाले सिद्धार्थ जैन को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि गिरोह में शामिल अनिकेत उर्फ कबीर और सलमान अभी फरार हैं। अवैध वसूली का तरीकाडीसीपी ने बताया कि विकास मित्तल की दिल्ली स्थित फर्म ए टू जेड को एनआईए/सीबीआई से संबंधित एक नोटिस मिला था। फर्म के मैनेजर योगेश ने अपने परिचित सलमान से इस नोटिस पर चर्चा की। सलमान ने उच्च अधिकारियों से जान-पहचान का दावा करते हुए मामला निपटाने की बात कही। इसके बाद सलमान और सिद्धार्थ जैन के माध्यम से अनिल प्रताप सिंह ने योगेश से संपर्क किया। अनिल प्रताप सिंह ने खुद को आईबी का संयुक्त निदेशक बताकर नोटिस का निपटारा कराने के लिए 15 करोड़ रुपये की मांग की, न देने पर विकास मित्तल को जेल जाने और फर्म बर्बाद होने की धमकी दी थी। अनिल प्रताप सिंह ने योगेश के बाद फर्म के मालिक विकास मित्तल से भी संपर्क किया और अवैध धन वसूली की।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )