दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल एवं अन्य आप नेताओं के खिलाफ याचिका खारिज की
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य करने और पार्टी को रजिस्ट्रेशन से हटाने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने न्यायाधीश स्वर्णा कान्ता शर्मा के 14 मई के आदेश का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि आप के ये नेता संविधान के प्रति निष्ठावान नहीं हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस याचिका को “अत्यंत अभिमत” बताते हुए कहा कि प्रस्तुत की गई दलीलें “पूरी तरह निराधार और बिना किसी वैधानिक आधार के हैं।”
साथ ही, याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को आप पार्टी का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया था। अदालत ने इस मांग को भी खारिज कर दिया क्योंकि चुनाव आयोग के पास राजनीतिक पार्टी के पंजीकरण की समीक्षा करने का अधिकार नहीं होता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग केवल तीन विशेष परिस्थितियों में ही किसी पार्टी का पंजीकरण रद्द कर सकता है: यदि पंजीकरण धोखाधड़ी से प्राप्त किया गया हो, यदि पार्टी ने अपने नाम या संरचना में प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार अनुचित परिवर्तन किया हो, या यदि पार्टी स्वयं आयोग के समक्ष अपना पंजीकरण निरस्त करने का अनुरोध करती हो।
यह निर्णय राजनीतिक दलों के दायरे और उनकी जवाबदेही संबंधी कानूनी प्रावधानों को लेकर अहम मान्यता देता है और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र की सीमा को स्पष्ट करता है।