इन फ्लैटों में रहने वाले परिवारों ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर घर बनाए थे। हर कमरे में जरूरत और पसंद का सामान धीरे-धीरे जोड़ा गया था। कुछ ही मिनटों में इन घरों का फर्नीचर, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, जरूरी दस्तावेज, बच्चों की किताबें सब कुछ जलकर खाक हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक से जुड़े दस्तावेज भी आग में जल गए। आग बुझने के बाद जब लोग अपने फ्लैटों में लौटे तो सामने सिर्फ जली हुई दीवारें और राख का ढेर था। जिन घरों में सुबह तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ था। कई लोग अपने जले हुए घरों के बाहर खड़े होकर रोते नजर आए। कोई राख में अपना सामान ढूंढ रहा था तो कोई खामोशी से टूटे सपनों को देख रहा था। फ्लैट संख्या 1145 में रहने वाले डॉ. डार सिंह ने बताया कि घर बनाने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन एक झटके में सब खत्म हो गया। अब फिर से शुरुआत कैसे होगी, समझ नहीं आ रहा। फ्लैट संख्या 942 भी आग की भेंट चढ़ गया। इसके मालिक अनूप शर्मा ने बताया कि लंबे समय से फ्लैट को सजाने-संवारने में लगे थे लेकिन अब सब राख हो चुका है।
ग़ाज़ियाबाद: चार घंटे की आग, मेहनत पानी, चपेट में आए फ्लैटों में रखी गृहस्थी हुई राख
इन फ्लैटों में रहने वाले परिवारों ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर घर बनाए थे। हर कमरे में जरूरत और पसंद का सामान धीरे-धीरे जोड़ा गया था। कुछ ही मिनटों में इन घरों का फर्नीचर, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, जरूरी दस्तावेज, बच्चों की किताबें सब कुछ जलकर खाक हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक से जुड़े दस्तावेज भी आग में जल गए। आग बुझने के बाद जब लोग अपने फ्लैटों में लौटे तो सामने सिर्फ जली हुई दीवारें और राख का ढेर था। जिन घरों में सुबह तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ था। कई लोग अपने जले हुए घरों के बाहर खड़े होकर रोते नजर आए। कोई राख में अपना सामान ढूंढ रहा था तो कोई खामोशी से टूटे सपनों को देख रहा था। फ्लैट संख्या 1145 में रहने वाले डॉ. डार सिंह ने बताया कि घर बनाने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन एक झटके में सब खत्म हो गया। अब फिर से शुरुआत कैसे होगी, समझ नहीं आ रहा। फ्लैट संख्या 942 भी आग की भेंट चढ़ गया। इसके मालिक अनूप शर्मा ने बताया कि लंबे समय से फ्लैट को सजाने-संवारने में लगे थे लेकिन अब सब राख हो चुका है।

