ग्रेटर नोएडा: ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए बन रहे इंटरचेंज का काम 15 अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, 25 सितंबर से शुरू हो रहे यूपीआईटीएस को देखते हुए यीडा इसे पहले ही सीमित रूप से चालू कराने की कोशिश कर रहा है।
यीडा चाहता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के फरीदाबाद व गुरुग्राम से आने वाले लोगों को यूपीआईटीएस पहुंचने में आसानी हो। इसके लिए प्राधिकरण एनएचएआई से बातचीत कर रहा है, ताकि इंटरचेंज को कुछ हिस्सों में पहले ही खोल दिया जाए।
83 हेक्टेयर में बन रहा है इंटरचेंज
जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास बन रहे इस इंटरचेंज में चार लूप और आठ रैंप बनाए जा रहे हैं। इनकी कुल लंबाई 13.308 किलोमीटर है। करीब 83 हेक्टेयर जमीन पर बन रहे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इंटरचेंज तैयार होने के बाद ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे सीधे एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे। इसके अलावा यीडा की 60 मीटर चौड़ी सड़क को भी इससे जोड़ा जाएगा।
पिछले महीने एनएचएआई के चेयरमैन संतोष यादव ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का जायजा लिया था। उन्होंने अधिकारियों को काम जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए थे।
20 किलोमीटर तक कम हो जाएगी दूरी
इंटरचेंज शुरू होने से वाहन चालकों को एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए ग्रेटर नोएडा होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे करीब 20 किलोमीटर की दूरी कम होगी और लोगों का समय भी बचेगा।
यूपीआईटीएस आने वालों को मिलेगी राहत
25 सितंबर से शुरू होने वाले यूपीआईटीएस में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के आसपास के इलाकों से लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए यीडा इंटरचेंज को सीमित स्तर पर पहले शुरू कराने की कोशिश में जुटा है।
प्राधिकरण चाहता है कि फरीदाबाद और गाजियाबाद की तरफ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर आने वाले वाहन सीधे यमुना एक्सप्रेसवे पर उतर सकें। इससे यूपीआईटीएस पहुंचने वाले लोगों को सफर में आसानी होगी और उनका समय व दूरी दोनों बचेंगे।

