गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देंगे कांग्रेस नेता
सीएम हिमंता सरमा की पत्नी पर टिप्पणी से जुड़ा विवाद
तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
असम पुलिस की छापेमारी के बीच खेड़ा की कानूनी लड़ाई तेज
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा दर्ज आपराधिक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका अस्वीकार कर दी थी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ 30 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी।
खेड़ा ने शीर्ष अदालत में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, जिसमे गुवाहाटी हाई कोर्ट के अग्रिम जमानत अस्वीकृति आदेश को चुनौती दी गई है। यह याचिका रविवार शाम दाखिल की गई थी और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
यह विवाद तब उभरा जब गुवाहाटी हाई कोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया ने अग्रिम जमानत से इंकार कर कहा था कि खेड़ा जमानत के विशेषाधिकार के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 339 के तहत प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला बनता है।
इससे पहले खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से सीमित अवधि के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी ताकि वे असम में नियमित राहत के लिए अदालत से संपर्क कर सकें, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस की याचिका पर उसे रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रोक हटाने और अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पहले के आदेश असम की सक्षम अदालत को जमानत याचिका पर फैसले में प्रभावित नहीं करेंगे।
खेड़ा ने इसके बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए पुनः याचिका दायर की है।
यह विवाद उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने दावा किया है कि रिनिकी भुयान सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, विदेशों में छुपाई गई लग्जरी संपत्तियां और शेल कंपनियों से संबंध हैं।
गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी और मानहानि के आरोप शामिल हैं।
असम पुलिस ने इस मामले में दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर छापेमारी की थी और हैदराबाद में भी जांच की जा रही है।