गुप्त निगरानी से रोबोट प्रशिक्षण: भारतीय फैक्ट्री कर्मचारियों का डेटा कैसे बन रहा है बड़े तकनीकी कंपनियों का हथियार
हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें भारतीय फैक्ट्री के कर्मचारियों को सिर पर कैमरा लगाए हुए दिखाया गया। यह वीडियो कई समाचार माध्यमों द्वारा चर्चा का विषय बना और सवाल उठे कि क्या इस तरीके से कर्मचारियों को अपनी ही जगह रोबोट से प्रतिस्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इस संदर्भ में CNN ने प्रश्न उठाया, “क्या फैक्ट्री कर्मचारी खुद को बदलने वाली AI को प्रशिक्षित कर रहे हैं?” हालांकि इन रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये कैमरे किसने लगाए और कहाँ लगाए गए थे।
स्क्रोल ने अपनी जांच में पता लगाया कि यह कैमरा सिर पर लगाए जाने वाले डिवाइस ग्रेटर नोएडा के निकट गुरुग्राम स्थित पर्ल ग्लोबल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की फैक्ट्री में उपयोग किए गए थे। पर्ल ग्लोबल एक ऐसा कपड़ा निर्माणकर्ता है जिसका संपूर्ण 10 देशों में संचालन है।
एक फैक्ट्री कर्मचारी ने बताया, “हमें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यह उपकरण पहनना था। अधिकारियों ने कहा कि वे यह जानना चाहते हैं कि हम अपनी शिफ्ट में क्या कर रहे हैं और कितना समय व्यतीत कर रहे हैं।”
इसी तरह के उपकरण मार्च 2026 में महाराष्ट्र के इचलकरंजी में स्थित केन इंडिया की फैक्ट्री में भी लगाए गए थे, जहां इनके उपयोग का उद्देश्य अलग बतलाया गया।
केन इंडिया ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में बताया कि यह हार्डवेयर Egolab.AI नामक एक स्टार्टअप का था जिसे जनवरी 2026 में दो युवाओं ने स्थापित किया था।
यह उपकरण और डेटा संग्रह तकनीक उद्योग में तेजी से बढ़ रहे ऑटोमेशन और डेटा-संचालित वातावरण का एक उदाहरण है जहां कार्य प्रणाली को समझने और उसे बेहतर करने के लिए नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है।
फैक्ट्री कर्मचारियों के डेटा का उपयोग AI प्रशिक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयास श्रमशील समुदायों की गोपनीयता और अधिकारों के प्रति गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों ने इसकी नैतिकता और पारदर्शिता पर चिंता जताई है।
वर्तमान में इस अनौपचारिक गतिविधि पर न तो सरकार की कोई स्पष्ट नीति है, न ही श्रमिकों को इस बारे में पूरी जानकारी दी गई है। ऐसे में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बढ़ रहे फासले तथा तकनीकी उपकरणों की भूमिका पर व्यापक चर्चा जरूरी हो गई है।
फेक्ट्री कर्मचारी अपनी दैनिक कामकाजी गतिविधि पर अनजाने में निगरानी का सामना कर रहे हैं, जिससे उनके निजी अधिकारों की सुरक्षा सम्बन्धी प्रश्न उत्पन्न होते हैं। तकनीकी प्रगति और मानवीय गरिमा के बीच संतुलन बनाना इस दौर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।