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दिल्ली: भगोड़ा अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी

द्वारका जिले में अपराध पर लगाम लगाने और कानून से बचकर घूम रहे भगोड़ा बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विशेष अभियान तेज कर दिया है। जिले के सभी थानों और यूनिटों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्र में भगोड़ा अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी करें। जिला पुलिस उपायुक्त कुशल पाल सिंह ने बताया कि ऐसे आरोपी जो अदालत से भगोड़ा घोषित किए जा चुके हैं या गंभीर मामलों में लंबे समय से फरार हैं, उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाकर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए टीमें सक्रिय की गई हैं। इसके लिए स्थानीय खुफिया तंत्र, तकनीकी निगरानी और पुराने रिकॉर्ड की मदद ली जा रही है। द्वारका जिला पुलिस की इस मुहिम के तहत पिछले एक सप्ताह में आधा दर्जन से अधिक वांछित और भगोड़ा घोषित आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डाबरी थाने के घोषित बदमाश ओम प्रकाश, द्वारका साउथ के मोहन, हत्या के प्रयास के आरोपी अवनीश, चोरी के मामले में भगोड़े अरविंद, सट्टेबाजी में शामिल रणवीर, आर्म्स एक्ट में राहुल और सरकारी आदेश का उल्लंघन में भगोड़ा अंशुल सचदेवा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।पुलिस अधिकारी का कहना है कि कई अपराधी वारदात के बाद अपनी पहचान बदलकर या दूसरे राज्यों में छिपकर रह रहे हैं। ऐसे आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें स्थानीय स्तर से लेकर बाहरी राज्यों तक जानकारी जुटा रही हैं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}