आईआईटी-दिल्ली बना भारत का शीर्ष तकनीकी संस्थान, शैक्षणिक प्रतिष्ठा में सुधार की आवश्यकता
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली (IIT-दिल्ली) ने 2027 के क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारत के शीर्ष स्थान को पुनः बरकरार रखा है। इस सूची में यह वैश्विक स्तर पर 118वीं रैंक पर है, जो भारत के किसी संस्थान के लिए सर्वोच्च है।
इस वर्ष की रैंकिंग में कुल 52 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल थे, जिनमें से 26 ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, 9 ने अपनी स्थिति बनाए रखी है, 15 की रैंकिंग में गिरावट आई है, और 2 नए विश्वविद्यालय पहली बार सूची में आए हैं।
भारत के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों में सात आईआईटी संस्थान शामिल हैं, जिनमें शीर्ष पांच स्थान भी आईआईटी के ही हैं। शोध प्रभाव या प्रति संकाय उद्धरणों के मामले में 11 भारतीय विश्वविद्यालय विश्व के शीर्ष 100 में स्थान पा चुके हैं, जो अनुसंधान की तीव्रता और मात्रा का प्रमाण है।
बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान ने प्रति संकाय उद्धरणों के मामले में विश्व स्तर पर 21वें स्थान पर कब्जा जमाया है। वहीं, आईआईटी-बॉम्बे ने नियोक्ता प्रतिष्ठा के आधार पर 32वां स्थान हासिल किया है, जो 69,400 से अधिक वैश्विक नियोक्ताओं के सर्वेक्षण पर आधारित है। आईआईटी-दिल्ली भी इसी मानक पर 39वें स्थान पर है।
‘‘मध्यम’’ शैक्षणिक प्रतिष्ठा
हालांकि, 2004 से चल रही इस रैंकिंग में उल्लेख किया गया है कि भारतीय विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक प्रतिष्ठा ‘‘मध्यम’’ बनी हुई है। यह संकेतक 1.2 लाख से अधिक शिक्षाविदों और नियोक्ताओं के सर्वेक्षण के आधार पर विश्वविद्यालयों और उनके कार्यक्रमों की प्रतिष्ठा को मापता है।
यह पक्ष दर्शाता है कि जबकि भारतीय संस्थान तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्ट हैं, उन्हें वैश्विक स्तर पर अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए और प्रयास करने की आवश्यकता है।