वैश्विक दक्षिण विश्व व्यवस्था के पुनर्निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है
विश्व की बदलती राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में, वैश्विक दक्षिण की महत्ता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यह क्षेत्र अब केवल विकास की दृष्टि से नहीं बल्कि विश्व शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाले मुख्य घटकों में से एक के रूप में उभर रहा है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन द्वारा उत्पन्न हुई ‘टूटी हुई’ विश्व व्यवस्था पर पहली बार मुखर होकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मझोले राष्ट्रों से अपील की कि वे एकजुट होकर लिबरल विश्व व्यवस्था की रक्षा करें।
लेकिन इस बदलाव में वैश्विक दक्षिण की क्या भूमिका होगी? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूमिका निर्णायक होगी। इस वर्ष की शुरुआत में, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की एक बैठक में कहा, “वैश्विक दक्षिण अगली विश्व व्यवस्था को तय करेगा।” उन्होंने आगे कहा, “वैश्विक शक्ति संतुलन बदल चुका है। वैश्विक दक्षिण के पास जनसांख्यिकी और आर्थिक दोनों ही पक्ष हैं। पश्चिमी प्रभुत्व वाला युग समाप्त हो चुका है। यह स्पष्ट है, लेकिन इसे पश्चिम में पूरी तरह स्वीकार किया जाना अभी शेष है।”
वैश्विक दक्षिण क्या है?
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पश्चिमी प्रभुत्व समाप्त हो चुका है, लेकिन वैश्विक दक्षिण की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरान के युद्ध जैसी घटनाओं से कुछ देशों को वर्तमान प्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसमें शक्ति की श्रेष्ठता को नियम माना जाता है।
वैश्विक दक्षिण कोई एकीकृत समूह नहीं है। इस शब्द का कोई निश्चित सीमांकन या परिभाषा नहीं है। नाम से ऐसा प्रतीत होता है कि यह उन देशों को शामिल करता है जो दक्षिणी गोलार्ध में स्थित हैं, लेकिन वास्तव में यह केवल स्थानिक संकेत नहीं देता, बल्कि सामरिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं से परिपूर्ण है।
वैश्विक दक्षिण में कई तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं, युवा जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है, जो इसे वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाती हैं। ऐसी चुनौतियां भी हैं, जैसे राजनीतिक अस्थिरता, विकास की असमानता और आंतरिक संघर्ष, जो इसके एकीकृत प्रभाव को सीमित करते हैं।
इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कैसे यह क्षेत्र अपनी सामूहिक ताकत का उपयोग करता है और वैश्विक व्यवस्था के पुनर्निर्माण में अपनी भूमिका को मजबूत करता है। भविष्य में वैश्विक दक्षिण के इर्द-गिर्द घटित घटनाएं विश्व राजनीति की दिशा को नए सिरे से परिभाषित कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, वैश्विक दक्षिण के बढ़ते प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में इसकी भूमिका निर्णायक हो सकती है, जो नई विश्व व्यवस्था की रीढ़ बन सकती है।