सत्यजीत राय के जीवन के रंगीन क्षण: नेमाई घोष की अनदेखी तस्वीरें
फोटोग्राफर नेमाई घोष ने पहली बार 1968 में फिल्म निर्माता सत्यजीत राय से मुलाकात की, जब राय अपनी फैंटेसी एडवेंचर फिल्म गोपी गैने बघा बिने बना रहे थे। तब से लेकर राय की अंतिम फिल्म अगंतुक (1991) तक, घोष राय के आधिकारिक फोटोग्राफर रहे और उन्होंने मास्टर की कार्यशैली और निजी जीवन को कलकत्ता में कैमरे में कैद किया।
नेमाई घोष द्वारा संकलित पुस्तक सत्यजीत राय @ 70 में राय ने घोष को ‘‘एक प्रकार के बॉसवेल जो कलम की बजाय कैमरे से काम करते हैं’’ के रूप में वर्णित किया है। अपनी पुस्तक माणिक-दा: मेमोरीज़ ऑफ सत्यजीत राय में घोष लिखते हैं, ‘‘जहाँ भी वे गए, मैं उनके साथ चल पड़ा। दूसरे शब्दों में, मैंने उनकी छाया की तरह उनका पीछा किया। मैं हर पल उन्हें अपनी कैमरे में कैद करने का दीवाना था।’’
नेमाई घोष का निधन 2020 में कोलकाता में 85 वर्ष की आयु में हुआ। उनकी ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरों का खजाना बड़े पैमाने पर प्रदर्शित और पुस्तक के रूप में संकलित किया गया। इसके अलावा, घोष ने राय की रंगीन तस्वीरें भी लीं, जिन्हें DAG आर्ट संस्था ने संग्रहित किया और 2011 में फेसस एंड फेसट्स: सत्यजीत राय इन कलर नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया।
इन रंगीन चित्रों की एक प्रदर्शनी 9 मई से 4 जुलाई तक दिल्ली के विंडसर पैलेस में आयोजित की जाएगी। ये तस्वीरें 1969 से 1991 तक ली गई हैं, जब राय डॉक्युमेंट्री सिक्किम बना रहे थे।
पुस्तक फेसस एंड फेसट्स में लेखक एंड्रयू रॉबिन्सन, जो राय के प्रमुख जीवनीकार हैं, लिखते हैं कि यह पुस्तक ‘‘घोष के अद्वितीय रचनात्मकता का फल’’ है। उन्होंने इन चित्रों के माध्यम से राय के विविध पहलुओं और उनके जीवंत व्यक्तित्व को एक नए नजरिए से प्रस्तुत किया है।