जम्मू कश्मीर के स्कूलों में ‘आपत्तिजनक’ सामग्री के प्रति कड़ी जांच के आदेश
जम्मू और कश्मीर सरकार ने कश्मीर संभाग के सभी सरकारी एवं मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों तथा कोचिंग केंद्रों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने परिसर में उपलब्ध सभी पुस्तकों की जांच करें ताकि किसी भी प्रकार की ‘अनुचित या आपत्तिजनक सामग्री’ को तुरंत पहचाना और हटाया जा सके। यह निर्देश द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है।
कश्मीर निदेशालय स्कूल शिक्षा ने संस्थानों से कहा है कि वे सभी पुस्तकालयों, कार्यालयों, कक्षाओं और स्टाफ रूम में उपलब्ध पुस्तकों का विशेष सत्यापन करें, चाहे वे हाल ही में प्राप्त की गई हों या पुरानी प्रकाशनें। यह निर्देश इस उद्देश्य से जारी किया गया है कि किसी भी पुस्तक में ऐसी सामग्री न हो जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सके, छात्रों के लिए अनुचित हो, या राष्ट्रहित के खिलाफ हो।
संस्थान प्रमुखों से प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने को भी कहा गया है जिसमें यह पुष्टि हो कि उनके स्कूल परिसर में कोई पुस्तक ‘आपत्तिजनक सामग्री’ नहीं रखी गई है। इस प्रमाणपत्र को संबंधित मुख्य या क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य होगा।
यह जांच सोमवार को जारी आदेश के तहत अनिवार्य की गई है, जिसका उद्देश्य सुनिश्चित करना है कि कोई पुस्तक ऐसा विषय न प्रस्तुत करे जो नीतिगत नियमों, शैक्षणिक मूल्यों या सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत हो।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पुस्तक में आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है तो उसके शीर्षक, लेखक, प्रकाशक, प्रकाशन वर्ष एवं उपलब्ध प्रतियों की संख्या सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसे सात दिन के भीतर उच्च अधिकारीयों को प्रस्तुत किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के तहत मुख्य शिक्षा अधिकारियों को भी कड़ी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है ताकि शैक्षिक संस्थानों में उचित और सुरक्षित पढ़ाई का माहौल सुनिश्चित किया जा सके।
इस दिशा में लिए गए कदमों का उद्देश्य विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक विकास को सुरक्षा प्रदान करना, तथा समाज में सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है, जो वर्तमान दौर में अत्यंत आवश्यक समझा जा रहा है।