किसी सहायक कंपनी को बिना विचार किए कॉर्पोरेट गारंटी जारी करने से मौद्रिक लाभ का कोई प्रवाह शामिल नहीं होता है और इसलिए, यह कर योग्य सेवा नहीं बनती है। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट एस मुरलीधरन कहते हैं, इस सिद्धांत को जीएसटी मामलों में एक वैध मिसाल के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है।