प्रीति यादव और मोनू की कहानी की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी, जब मोनू उसे ऑटो से छोड़ने गया और पहली ही मुलाकात में उसकी ओर आकर्षित हो गया। वक्त के साथ दोनों की नज़दीकियां बढ़ने लगीं। मोनू शादीशुदा था और उसके तीन बच्चे थे, जबकि प्रीति भी दो बच्चों की मां थी और पति से अलग रह रही थी। लेकिन उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि यह रिश्ता इतना भयावह मोड़ लेगा।
जब यह बात प्रीति के पति को पता चली, तो वह बच्चों और पत्नी को छोड़कर बिहार चला गया। इस वजह से प्रीति मोनू को जिम्मेदार ठहराती थी और उसे अपराधबोध महसूस कराने लगी थी। वह मोनू से प्लॉट दिलाने के बदले पांच लाख रुपये देने और शादी कर साथ रहने पर जोर दे रही थी। मोनू के इनकार करने पर वह लगातार उसका अपमान कर रही थी। मोनू को अपने परिवार की ओर से भी ताने सुनने पड़ रहे थे।
इसी तनाव में उसने फिल्मी स्टाइल में हत्या की साजिश रच डाली। हालांकि, नोएडा पुलिस ने नौ दिन की जांच के बाद इस पूरी कहानी का राजफाश कर दिया।
मोनू के भीतर प्रीति के प्रति गुस्सा इतना गहरा था कि उसने बर्बर तरीके से उसकी हत्या कर दी। वह शाम करीब 6:55 बजे सेक्टर-105 पहुंचा और लगभग 15 मिनट के भीतर वारदात को अंजाम दे दिया। गला और हाथ काटने के बाद वह वहीं बैठा रहा और गांजा आदि का नशा करता रहा। जब शरीर से खून बहना बंद हो गया, तो वह सिर और हाथ अलग किए हुए शव को नाले में फेंककर बस लेकर गाजियाबाद की ओर निकल गया।
लेकिन उसका गुस्सा वहीं शांत नहीं हुआ। गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार में उसने कटे हुए सिर पर बस के पहिए कई बार चढ़ाए। सिर इस तरह कुचला गया कि मांस बालों से चिपका हुआ मिला।
प्रीति के पति की उम्र काफी ज्यादा बताई जा रही है
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रीति का पति उम्र में उससे काफी बड़ा था। चर्चा यह भी है कि प्रीति को कम उम्र में ही खरीदकर लाया गया था और उसे प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती थी। पति के पहले से तीन-चार बच्चे थे और प्रीति से दो। आपराधिक प्रवृत्ति का होने के कारण वह घर पर कम रहता था, जिससे प्रीति को बच्चों के पालन-पोषण के लिए फैक्ट्री में काम करना पड़ता था।
इसी दौरान जब वह मोनू के संपर्क में आई तो उसे आर्थिक सहारा मिला, लेकिन प्लॉट दिलाने की बात पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और अंत में यह रिश्ता एक भीषण अपराध की वजह बन गया।

