महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि UCC का मसौदा तैयार करने वाली समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई के नेतृत्व में सात सदस्यों वाली यह समिति फिलहाल अपनी सिफारिशें तैयार कर रही है। सरकार की कोशिश है कि नागपुर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में UCC को लेकर विधेयक पेश किया जाए।
फडणवीस का बयान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने UCC को लेकर बड़ा लक्ष्य बताया था। अमित शाह के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकारें 21 राज्यों में हैं और इन सभी राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी।
महाराष्ट्र में UCC को लेकर समिति का गठन राज्य सरकार ने जुलाई में किया था। इसे अपनी सिफारिशें देने के लिए छह महीने की समयसीमा दी गई है। समिति की अध्यक्ष रंजना देसाई के साथ हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर सी चव्हाण और न्यायमूर्ति एस जी मेहरे भी इसका हिस्सा हैं। इनके अलावा पूर्व मुख्य सचिव डी के जैन, पूर्व महाधिवक्ता वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद् सुवर्णा रावल को भी समिति में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि UCC पर बनाई गई समिति अपना काम कर रही है। उनके अनुसार, समिति की रिपोर्ट सरकार के पास पहुंचने के बाद समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
UCC को लेकर फडणवीस ने यह भी बताया कि तीन राज्यों में इसका बिल पहले ही पेश होकर पास हो चुका है। उत्तराखंड में फरवरी 2024 में, गुजरात में मार्च 2026 में और असम में मई 2026 में UCC बिल पेश और पारित किया गया।

