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दिल्ली: मालवीय नगर में होटल में लगी भीषण आग के मामले की जांच में कई बड़े खुलासे

दिल्ली के मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टे होटल में 3 जून को हुए भीषण अग्निकांड की जांच में कई गंभीर लापरवाही सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि एक छोटी सी चाय की चुस्की, एक लावारिस छोड़ा गया तेल फ्रायर और आग लगने के बाद भी किसी को सूचित न करने वाले रसोइए की निष्क्रियता, इस भयावह त्रासदी के पीछे की कड़वी सच्चाई है।जांचकर्ताओं के अनुसार, आग की शुरुआत होटल के किचन में तब हुई जब रसोइया केशव नेगी चाय बना रहा था। उसने तेल से भरे फ्रायर को चालू छोड़ा और चाय पीते समय उसे भूल गया। जैसे ही तेल का तापमान ऑटो-इग्निशन बिंदु तक पहुंचा, उसने अचानक आग पकड़ ली, जिससे छत में आग लग गई और देखते ही देखते आग तेजी से पूरे होटल में फैल गई।

आग लगने के कारणों को और स्पष्ट करने के लिए, दिल्ली पुलिस आईआईटी दिल्ली की मदद लेने की तैयारी कर रही है। संस्थान से आग के फैलने की गति, संरचनात्मक अध्ययन और 3डी मैपिंग जैसे विश्लेषण की उम्मीद है, ताकि घटनाओं के क्रम को समझा जा सके और उन कारकों की पहचान की जा सके जिन्होंने लोगों को अंदर फंसा दिया।

कर्मचारियों की भूमिका और देरी का खामियाजा
जांच में यह भी सामने आया है कि आग लगने के समय होटल में तीन कर्मचारी मौजूद थे: रसोइया केशव नेगी, एक हेल्पर जो ऊपरी मंजिल पर सो रहा था, और मैनेजर रुपेश उर्फ राकेश। पूछताछ के दौरान, केशव नेगी ने कथित तौर पर बताया कि उसने फ्रायर चालू छोड़ दिया था और आग लगने के बाद उसने उसे बुझाने की कोशिश की, लेकिन जब आग उसके नियंत्रण से बाहर हो गई तो वह भाग गया।

आरोप है कि उसने आग की चेतावनी देने, पड़ोसियों को सूचित करने या आपातकालीन सेवाओं को कॉल करने में देरी की। यह भी पता चला है कि आग लगने के पहले संकेतों और पुलिस को पहली कॉल के बीच लगभग आधे घंटे का अंतर था।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )