एमसीडी के अनुसार, फुटपाथ और चौराहों पर डाले जाने वाले दाने से न केवल कबूतरों की बीट और बचा हुआ अनाज फैलता है, बल्कि वही स्थान चूहों का सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। ये चूहे दाना मिलने के कारण वहीं बस जाते हैं और धीरे-धीरे फुटपाथ की मिट्टी, इंटरलॉकिंग टाइल्स और सड़क किनारे की संरचना को खोदकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पैदल यात्रियों को परेशानी होती है और कई जगहों पर सड़क धंसाने व गड्ढों की स्थिति बन जाती है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए खतरा है, बल्कि दिल्ली की छवि पर भी सीधा असर डालती है। कई विदेशी मेहमानों और पर्यटकों वाले इलाकों में भी यह समस्या सामने आई है, जिसको लेकर एमसीडी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। द्वारका समेत कई इलाकों में एक ही दिन में दर्जनों चालान
एमसीडी ने दो फरवरी को द्वारका क्षेत्र में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान द्वारका सेक्टर-13, सेक्टर-11, राजा पुरी मुख्य मार्ग, कारगिल चौक, दुर्गा चौक और सेक्टर-23 जैसे इलाकों में खुले में कबूतरों को दाना डालते कई लोगों को पकड़ा गया। इन मामलों में दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 357 और 357/397 के तहत कार्रवाई की गई और अधिकतर मामलों में 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया। कुछ लोगों ने यह जुर्माना मौके पर नकद चुकाया, जबकि कुछ ने ऑनलाइन माध्यम से भुगतान किया। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत भी सख़्ती
एमसीडी ने साफ किया है कि केवल डीएमसी एक्ट ही नहीं, बल्कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2016 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। एक मामले में सार्वजनिक सड़क पर कबूतरों का दाना बेचने और फैलाने पर 500 रुपये का स्पॉट फाइन लगाया गया।

