एमएमआरडीए ने गोदरेज विखरौली कैम्पस के लिए डायरेक्ट मेट्रो लिंक की मंजूरी दी
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) ने विखरौली में गोदरेज वाणिज्यिक परिसर को मेट्रो लाइन 4 स्टेशन से जोड़ने के लिए एक डायरेक्ट फुटओवरब्रिज (एफओबी) निर्माण को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य मुंबई के विस्तारित मेट्रो नेटवर्क में अंतिम मील की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
यह प्रस्ताव मुंबई में निजी विकास के तहत मेट्रो स्टेशन के लिए सीधे प्रवेश के लिए एमएमआरडीए द्वारा जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) पाने वाला दूसरा प्रोजेक्ट है। इससे पहले, ओबेरॉय मॉल को मेट्रो लाइन 7 पर इसी प्रकार की मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित फुटओवरब्रिज के माध्यम से कर्मचारी, आगंतुक और यात्री व्यस्त एलबीएस रोड को पार किए बिना सीधे गोदरेज परिसर तक पहुँच सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह कनेक्शन पैदल यात्री सुरक्षा को बढ़ावा देगा, यात्रा समय घटाएगा और मेट्रो के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा।
एमएमआरडीए की नीति के तहत, जो वाणिज्यिक और आवासीय विकास सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी चाहते हैं, उन्हें एक बार का गैर-वापसीयोग्य विकास शुल्क जमा करना होता है। इसके अतिरिक्त, आवेदक को फुटओवरब्रिज के डिजाइन और निर्माण की पूरी लागत वहन करनी होती है तथा निर्माण लागत का छह प्रतिशत एमएमआरडीए की पर्यवेक्षण फीस के रूप में देना होता है। प्रत्येक प्रस्ताव को मंजूरी से पूर्व विस्तृत तकनीकी, संरचनात्मक और सुरक्षा परख से गुजरना होता है।
गोदरेज एंड बॉयस ने एमएमआरडीए को ₹10 करोड़ का एक बार का गैर-वापसीयोग्य विकास शुल्क अदा किया है और फुटओवरब्रिज के निर्माण की पूरी लागत वहन करेगा। इस चेक को गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट तथा बिजनेस हेड अनुप मैथ्यू ने एमएमआरडीए के महानिदेशक डॉ. संजय मुखर्जी और अन्य अधिकारियों को सौंपा। एमएमआरडीए ने बताया कि इस मॉडल को पहले ओबेरॉय मॉल को मेट्रो स्टेशन से सीधे कनेक्शन प्रदान कर लागू किया जा चुका है, जिससे यात्री मुख्य सड़क पर कदम रखे बिना वाणिज्यिक परिसर में सीधे प्रवेश कर सकते हैं।
प्राधिकरण फिलहाल अन्य समान प्रस्तावों की भी समीक्षा कर रहा है, जिनमें विशिष्ट रूप से मेट्रो लाइन 2B पर भारत डायमंड बोर्स का प्रस्ताव शामिल है। यदि यह परियोजना स्वीकृत हुई, तो यह लगभग 40,000 दैनिक उपयोगकर्ताओं को लाभान्वित करेगी, आस-पास के रोडों पर पैदल यात्री भीड़ को कम करेगी और मेट्रो के प्रयोग को बढ़ावा देगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि यह नीति मुख्य वाणिज्यिक और आवासीय विकासों को सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करने तथा अंतिम मील की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि इस पहल से मेट्रो की सवारी बढ़ेगी, किराया राजस्व में वृद्धि होगी और एक बार के विकास शुल्क के माध्यम से अतिरिक्त गैर-किराया राजस्व उत्पन्न होगा, जो मेट्रो नेटवर्क की वित्तीय स्थिरता को समर्थन देगा। उप मुख्यमंत्री एवं एमएमआरडीए अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने कहा कि प्राधिकरण को वाणिज्यिक एवं आवासीय विकासों से सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी हेतु प्रोत्साहनपूर्ण प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। हर प्रस्ताव को मंजूरी से पहले कठोर तकनीकी और सुरक्षा जाँच से होकर गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह पहल मेट्रो स्टेशनों के आसपास के भीड़भाड़ को कम करती है, यात्री सुविधा बढ़ाती है और स्थायी गैर-किराया राजस्व उत्पन्न करती है।
एमएमआरडीए महानिदेशक डॉ. संजय मुखर्जी ने कहा कि यह पहल मेट्रो स्टेशनों को प्रमुख वाणिज्यिक और आवासीय स्थलों के साथ एकीकृत करने का लक्ष्य रखती है, जिसमें कनेक्टिविटी की लागत लाभार्थी संस्थानों द्वारा वहन की जाती है। एमएमआरडीए के अनुसार, यह नीति यात्री अनुभव को बेहतर बनाने, सड़क-आधारित पहुँच पर निर्भरता कम करने और मेट्रो नेटवर्क के लिए अतिरिक्त गैर-किराया राजस्व उत्पन्न करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।