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एमएसआरडीसी ने मुआवजा वनरोपण के लिए निजी भूमि की प्रस्तावना जारी की

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May 2, 2026 #msrdc, #noc, #source
MSRDC releases EoI for Private Land for Compensatory Afforestation

एमएसआरडीसी की निजी भूमि खरीद योजना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया

महाराष्ट्र सरकार के राजमार्ग विकास निगम (MSRDC) की मुआवजा वनरोपण के लिए निजी भूमि खरीदने की योजना को लेकर शिव सेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य में नए राजनीतिक विवाद ने जन्म लिया है।

एमएसआरडीसी ने घोषणा की है कि वह पूरे महाराष्ट्र में निजी स्वामित्व वाली जमीन खरीदकर मुआवजा वनरोपण के लिए उपयोग करेगी। मुआवजा वनरोपण का उद्देश्य पर्यावरण और वन विभागों द्वारा आवश्यक मंजूरियों के तहत बनाए गए नियमों को पूरा करना है, जो विशेषकर नए इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी होते हैं। कई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है, जिसके तहत हरियाली क्षेत्र के लिए भूमि का निर्धारण कर उसे वन विभाग को सौंपा जाएगा।

हालांकि, इस कदम का टाइमिंग शिव सेना के सांसद संजय राउत ने सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा कि जब पहले से ही सरकारी भूमि उपलब्ध है, तो निजी भूमि क्यों मांगी जा रही है। उन्होंने बॉम्बे सी लिंक परियोजना के अंतर्गत पुनः प्राप्त भूमि के रियल एस्टेट विकास के लिए हस्तांतरण का उदाहरण देते हुए बांद्रा रिक्लेमेशन प्लॉट का जिक्र किया, जहाँ हरित क्षेत्र के स्थान पर निर्माण कार्य हुए। राउत ने इसे मज़ेदार विरोधाभास करार दिया और सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार को लगता है कि जनता इस विरोधाभास को नहीं समझेगी।

एमएसआरडीसी की अभिरुचि के अनुसार, मुआवजा वनरोपण के लिए भूमि महाराष्ट्र में स्थित होनी चाहिए और कम से कम पाँच हेक्टेयर की एक जगह पर होनी चाहिए। भूमि का शीर्षक स्पष्ट, बाजार योग्य और बंधन, बंधक, दावे या कानूनी विवादों से मुक्त होना आवश्यक है। यदि भूमि पैतृक है, तो 7/12 रसीद पर दर्ज सभी नामों से नापासंदगी प्रमाणपत्र (NOC) अनिवार्य है।

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया सीधे खरीद के आधार पर होगी। एमएसआरडीसी के एक अधिकारी ने बताया कि यह नियम पर्यावरण, वन, वन्यजीव और तटीय नियमों से संबंधित मंजूरी से जुड़ा है। इस विवाद ने फरवरी 2024 में हुए बांद्रा रिक्लेमेशन पुनः विकास सौदे पर भी प्रकाश डाला है, जिसमें अदानी रियल्टी ने 24.2 एकड़ के प्लॉट के लिए सबसे अधिक बोली लगाई थी। कंपनी ने 22.7 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया, जो लार्सन एंड टुब्रो की 18 प्रतिशत से अधिक थी। इस भूमि प्लॉट का विकास क्षमता लगभग 45 लाख वर्ग फुट और मूल्य लगभग ₹30,000 करोड़ आंका गया है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)