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मुंबई: पर्यावरणविदों ने एसजीएनपी का नाम बदलने और विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के प्रस्ताव का विरोध किया

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May 28, 2026 #source
Mumbai: Environmentalists Oppose Proposal to Rename SGNP and Construct University Campus

पर्यावरणविदों ने एसजीएनपी का नाम बदलने और विश्वविद्यालय परिसर निर्माण के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया

मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) के नाम परिवर्तन और इसके पास या भीतर एक विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण को लेकर पर्यावरणविदों और नागरिक समूहों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि यह कदम मुंबई के पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

विवाद तब उभरा जब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में कुछ प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा शुरू हुई, जिनमें शैक्षिक संस्थान की स्थापना शामिल है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह का निर्माण कार्य पूरी तरह से अस्वीकार्य है क्योंकि यह उद्यान मुंबई का एक महत्वपूर्ण हरा भरा फेफड़ा और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है।

पर्यावरणविदों ने बताया कि उद्यान में तेंदुए, हिरण, विभिन्न पक्षी प्रजातियां तथा कई संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र मौजूद हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास वन्यजीव गलियारों को बाधित कर सकता है, मानवीय हस्तक्षेप बढ़ा सकता है और कमजोर पारिस्थितिकी तंत्र पर और दबाव डाल सकता है।

पर्यावरण समूहों ने नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर भी चिंता जताई है क्योंकि इससे संरक्षित वन क्षेत्र की पहचान में कमी या बदलाव हो सकता है। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से पहले व्यापक सार्वजनिक परामर्श और पर्यावरणीय जांच आवश्यक है।

संरक्षणविदों के अनुसार, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता, भूजल पुनर्भरण और जलवायु स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वे बढ़ती शहरीकरण और घटते हरित आवरण के बीच उद्यान को वर्तमान स्वरूप में संरक्षित रखना अनिवार्य समझते हैं।

यह मुद्दा पर्यावरण विशेषज्ञों, नागरिकों और राजनैतिक समूहों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ सक्रिय कार्यकर्ता राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से जुड़े किसी भी भविष्य के योजनाओं में पूरी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं से जुड़ी चर्चाएं अभी प्रारंभिक चरण में हैं और सभी निर्णय कानूनी एवं पर्यावरणीय प्रक्रियाओं के अनुरूप होंगे।

पर्यावरण संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि यदि संरक्षित क्षेत्र के भीतर निर्माण संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो उनका विरोध और तेज हो जाएगा।

संदर्भ: 29 मई को बकरी ईद के अवसर पर 58 अतिरिक्त बीईएसटी बस सेवाएं संचालित होंगी।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)