एनडीएमसी अनुसार लके चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मृगांक बोरा ने कहा कि विभाग एनजीटी के निर्देशों के गातार कार्रवाई कर रहा है और सफाई, जागरूकता और नियम पालन पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। एनडीएमसी इलाके में 15 से अधिक प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन अभियानों के जरिए लोगों को समझाया गया कि बंदरों को खिलाना उनकी आदत बदल देता है और यह इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। कुत्तों को खिलाने के लिए नई व्यवस्था लागू
रिपोर्ट के अनुसार, कुत्तों को खिलाने के लिए भी एनडीएमसी ने नई व्यवस्था लागू की है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए)के साथ मिलकर 100 तय फीडिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां लोग निर्धारित तरीके से ही कुत्तों को खाना खिला सकते हैं। इन स्थानों पर निर्देश बोर्ड लगाए गए हैं और साफ-सफाई के नियम भी लागू किए गए हैं। रिपोर्ट के साथ एनडीएमसी ने फोटो, चालान, सोशल मीडिया अभियान और अनुबंध से जुड़े दस्तावेज भी एनजीटी को सौंपे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि लोगों ने बंदरों को पकड़ने से मिली राहत को स्वीकार किया है और कई लोगों ने शेष बंदरों को पकड़ने के लिए इस प्रक्रिया को दोहराने का अनुरोध किया है।

