न्याय की मांग के साथ मणिपुर जनजातीय समूहों ने दिल्ली में तीन साल पुरानी जातीय हिंसा का विरोध प्रदर्शन किया
दिल्ली में मणिपुर के विभिन्न जनजातीय समूहों ने तीन वर्षों से जारी जातीय संघर्ष के खिलाफ ‘‘न्याय नहीं, शांति नहीं’’ के नारे के साथ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। आयोजन का उद्देश्य केंद्रीय और राज्य सरकारों से त्वरित कार्रवाई और उपयुक्त न्याय प्राप्त करना था।
विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रतिनिधियों ने बताया कि मणिपुर में 2021 से चल रही जातीय हिंसा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हिंसा के चलते हजारों लोग विस्थापित हुए, उनके घर और सम्पत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान सरकार की कार्रवाई धीमी और अंधी रही, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है।
प्रदर्शन में उपस्थित पुरुष, महिला और बुजुर्ग सभी ने अपनी आवाज़ को बुलंद करते हुए, यह स्पष्ट किया कि न्याय की बहाली के बिना शांति का आना संभव नहीं है। उन्होंने केंद्र व मणिपुर सरकार से तुरंत जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। सामाजिक न्याय एवं सुरक्षा की गारंटी के बिना आने वाली पीढ़ियाँ असुरक्षित रहेंगी, यह संदेश उन्होंने दिया।
पृष्ठभूमि के रूप में बताया गया कि मणिपुर में मुख्य रूप से स्थानीय और बाहरी जनजातियों के बीच जमीन, संसाधन और राजनीतिक अधिकार को लेकर तनातनी व संघर्ष लंबे समय से मौजूद है, जो समय-समय पर हिंसात्मक रूप ले लेती है। 2021 की हिंसा से यह संघर्ष पूरे राज्य में उग्र हो गया था, जिससे व्यापक मानवाधिकार हनन हुए।
विपक्ष के नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस हिंसा की निंदा की और सरकार से सचेत रहने का आह्वान किया। वे संकेत देते हैं कि न केवल तत्काल राहत बल्कि दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने हेतु सामाजिक समावेशन और विकास की योजना बनाई जानी चाहिए।
अंत में, इस विरोध प्रदर्शन ने समाज के समक्ष मणिपुर के जनजातीय समूहों की व्यथा और न्याय की अपील को मजबूती से पेश किया है, जो केवल एक आवाज़ नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य की आशा है।