स्थानीय लोगों का कहना है कि दनकौर के पास यमुना एक्सप्रेसवे से उतरने का रैंप है, लेकिन वहां पर दनकौर जाने के लिए कोई दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगा है। जबकि बड़ी संख्या में लोग दनकौर जाते है। ऐसे में वो भटकते रहते है। निवासी संदीप जैन का कहना है कि दनकौर महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम हुआ करता था। जहां कौरव व पांडवों ने शिक्षक ली थी। ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर है। दनकौर रेलवे स्टेशन है, लेकिन एक्सप्रेस वे से उतरने के बाद लोग यहां तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। इसी चक्कर में कई बार लोग परी चौक पहुंच जाते है, जो 20 किमी दूर है।
ग्रेटर नोएडा: लोगों ने विरोध जताकर बोर्ड लगाने की मांग की
स्थानीय लोगों का कहना है कि दनकौर के पास यमुना एक्सप्रेसवे से उतरने का रैंप है, लेकिन वहां पर दनकौर जाने के लिए कोई दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगा है। जबकि बड़ी संख्या में लोग दनकौर जाते है। ऐसे में वो भटकते रहते है। निवासी संदीप जैन का कहना है कि दनकौर महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम हुआ करता था। जहां कौरव व पांडवों ने शिक्षक ली थी। ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर है। दनकौर रेलवे स्टेशन है, लेकिन एक्सप्रेस वे से उतरने के बाद लोग यहां तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। इसी चक्कर में कई बार लोग परी चौक पहुंच जाते है, जो 20 किमी दूर है।

