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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, पांच दिन में दूसरी बढ़ोतरी से बढ़ी आम आदमी की चिंता

पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, पांच दिन में दूसरी बढ़ोतरी से बढ़ी आम आदमी की चिंता

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पांच दिन के अंदर दूसरी बढ़ोतरी, आम जनता की जेब पर बढ़ा बोझ

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमते एक बार फिर से बढ़ा दी गई हैं। पांच दिनों के अंदर यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इससे आम आदमी के लिए आर्थिक दबाव बढ़ना स्वाभाविक है, विशेष रूप से रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा, ऑटो-रिक्शा चालक और कैब ड्राइवर प्रभावित हो रहे हैं।

पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई वृद्धि

हाल ही में पेट्रोल की कीमत में 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 83 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि देखी गई है। इससे पहले 15 मई को दोनों ईंधनों के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया था। इस प्रकार, केवल पांच दिन में पेट्रोल और डीजल लगभग 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि इससे पहले ये क्रमशः 97.77 रुपये और 90.67 रुपये प्रति लीटर थे।

सीएनजी उपभोक्ताओं पर भी असर

पेट्रोल-डीजल के अलावा सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमतें 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाई गई हैं। इससे पहले 15 मई को भी सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए थे। नई दरों के अनुसार दिल्ली में सीएनजी की कीमत पहली बार 80 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है, जहां यह 80.09 रुपये प्रति किलो पर है, वहीं नोएडा में सीएनजी की कीमत 88.70 रुपये प्रति किलो हो गई है।

आम जनता के बजट पर बढ़ेगा भार

ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें सीधे आम आदमी की मासिक आय पर दबाव डाल रही हैं। रोजाना ऑफिस जाने वाले लोग अब ज्यादा खर्च करने को मजबूर होंगे। साथ ही परिवहन और माल ढुलाई महंगी होने से आवश्यक वस्तुओं जैसे सब्जियां, दूध और अन्य खाद्य सामग्री के दाम भी बढ़ने की संभावना है। ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक पहले से ही महंगे ईंधन की वजह से कमाई में कमी महसूस कर रहे हैं। कई शहरों में किराये में वृद्धि की मांग भी तेज हो सकती है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की महंगी होती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से संबंधित स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। ईरान संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है और तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। भारत का तेल आयात इस वैश्विक स्थिति से सीधे प्रभावित होता है।

रुपये की गिरावट से समस्याएं बढ़ीं

डीजल-पेट्रोल की महंगाई के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में रुपया 96.23 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये के कमजोर होने का अर्थ है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है या रुपया और कमजोर होता है तो ईंधनों के दामों में और वृद्धि हो सकती है।

महंगाई और बाजार पर व्यापक प्रभाव

ईंधन की बढ़ी कीमतों का प्रभाव सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, यह शेयर बाजार, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर डालता है। बढ़ती महंगाई से उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता प्रभावित होती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सरकार और तेल कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे वैश्विक मूल्य वृद्धि और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन कैसे बनाएं। फिलहाल आम जनता को राहत मिलने की संभावनाएं न्यून हैं।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)