दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता बिगड़ी, एक्यूआई 208 पर ग्रैप-1 लागू
नई दिल्ली: दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण स्तर में वृद्धि के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक्यूआई 208 पहुंचते ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के पहले चरण, ग्रैप-1 को तुरंत लागू किया है। यह कदम क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक उपायों को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सब-कमेटी ने खराब स्थिति को देखते हुए ग्रैप-1 के तहत सभी प्रतिबंधों को लागू करने का आदेश दिया है। इनमें पॉल्यूशन कंट्रोल यंत्रों (PUC) के कड़े निरीक्षण, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और सफाई के लिए सड़क मशीनों का उपयोग शामिल है। इन कदमों से प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।
सीएक्यूएम ने भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमानों के आधार पर यह निर्णय लिया है ताकि प्रदूषण की वृद्धि को रोका जा सके और सूक्ष्म कणों के स्तर को कम किया जा सके।
सीएक्यूएम की फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों ने 29 अप्रैल से 19 मई के बीच कुल 125 निरीक्षण किए, जिसमें 39 नियम उल्लंघन पाए गए। ये उल्लंघन निर्माण और ध्वस्तीकरण साइटों, औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटर सेटों से संबंधित थे। 20 निरीक्षण निर्माण और ध्वस्तीकरण क्षेत्र में, 51 औद्योगिक क्षेत्रों में तथा 54 डीजल जनरेटर सेटों पर हुए।
प्रवर्तन कार्यबल की 131वीं बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि कुल उल्लंघनों में से 10 निर्माण एवं ध्वस्तीकरण साइटों, 10 औद्योगिक इकाइयों और 19 डीजल जनरेटर सेटों से जुड़े थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर सात इकाइयों को बंद करने, 13 डीजल जनरेटर सेट सील करने, 12 कारण बताओ नोटिस जारी करने, चार मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाने और तीन मामलों में सलाह देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इनमें से छह कार्रवाई पहले ही पूरी हो चुकी है जबकि बाकी की प्रक्रिया जारी है। कार्यबल ने 130वीं ईटीएफ बैठक के बाद की कार्रवाई की समीक्षा भी की, जिसमें पाया गया कि संबंधित एजेंसियों ने औद्योगिक क्षेत्र, निर्माण-ध्वस्तीकरण सेक्टर और डीजल जनरेटर सेट से जुड़े सभी उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई पूरी कर ली है।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि नियमों के पालन सुनिश्चित होने के बाद अब तक 17 इकाइयों को पुनः संचालन की अनुमति दी गई है, जिनमें 13 औद्योगिक इकाइयां और चार निर्माण एवं ध्वस्तीकरण साइट शामिल हैं। यह संकेत करता है कि सही कदम उठाकर प्रदूषण नियंत्रण में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।