• Fri. May 15th, 2026

दिल्ली: पीडब्ल्यूडी ने 448 पॉइंट के लिए जारी किया एक्शन प्लान

ByAnkshree

May 15, 2026 #Delhi, #NCR, #Noida, #PWD
मानसून की दस्तक से पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने राजधानी को डूबने से बचाने के लिए सख्त और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। पिछले वर्षों (2023, 2024 और 2025) के अनुभवों और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के इनपुट के आधार पर विभाग ने दिल्ली में 448 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां भारी बारिश के दौरान पानी भरने की सबसे अधिक संभावना रहती है।

इस बार पीडब्ल्यूडी का रुख पहले से कहीं अधिक कड़ा है। बीते दिनों जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी 448 जलभराव वाले बिंदुओं के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार अधिकारी और समीक्षा अधिकारी तैनात किए गए हैं। आदेश में बताया गया है कि नामित अधिकारियों को मानसून 2026 के दौरान जलभराव रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया गया है। यदि उनके आवंटित क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली को तीन मुख्य जोन ईस्ट, साउथ और नॉर्थ में विभाजित किया गया है। विभाग की ओर से प्रत्येक जाेन के लिए विस्तृत एनेक्सर जारी किए गए हैं, जिनमें सड़क का नाम, सटीक स्थान, संबंधित डिवीजन, और वहां तैनात कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) के नाम व मोबाइल नंबर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने इस बार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय विधायकों के साथ भी समन्वय बिठाने की कोशिश की है।

हर पॉइंट पर ट्रिपल लेयर निगरानी
विभाग ने इस बार प्रत्येक जलभराव वाले स्थानों के लिए तीन-तीन अधिकारियों की तैनाती की है। इसमें कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) शामिल है। ऐसा इसलिए किया गया है कि अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई विवाद नहीं हो। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि जब अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विभागों में तालमेल का अभाव रहा है। विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी अपने आवंटित पॉइंट की निगरानी, जलनिकासी व्यवस्था और आपात प्रतिक्रिया के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )