राज्यसभा में भाजपा की मजबूती, AAP विधायिका दल का विलय स्वीकृत
राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायिका दल के भाजपा में विलय को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया।
इस निर्णय के तीन दिन पहले शुक्रवार को AAP के दस सदस्यों में से सात सदस्य राज्यसभा में पार्टी से अलग होकर भाजपा के विधायिका दल में शामिल होने की घोषणा कर चुके थे। इनमें AAP के पूर्व डिप्टी लीडर राघव चड्ढा भी शामिल हैं। अब ये सभी सदस्य राज्यसभा में भाजपा के हिस्से माने जाएंगे।
इस विलय के बाद भारत की 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा के पास कुल 113 सांसद हो गए हैं। वहीं AAP के पास राज्यसभा और लोकसभा में तीन-तीन सांसद हैं।
किसी पार्टी या गठबंधन को राज्यसभा में बहुमत के लिए 123 सदस्य का समर्थन जरूरी होता है। इस विलय के बाद भाजपा-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास कम से कम 136 सदस्य हो गए हैं।
भाजपा की यह संख्या पांच नामांकित सांसदों को भी शामिल करती है जो पार्टी में शामिल हो चुके हैं। वहीं राष्ट्रपति द्वारा नामांकित और अन्य सात सांसद ऐसे हैं जो भाजपा से संबंधित नहीं हैं।
रविवार को AAP के राज्यसभा नेता संजय सिंह ने राधाकृष्णन को एक याचिका सौंपकर उन सात सांसदों की सदस्यता समाप्ति की मांग की है, जिन्होंने भाजपा के विधायिका दल में शामिल होकर भाजपा की सदस्यता ली है।
संजय सिंह के अनुसार यह कदम दलबदल कानून का उल्लंघन है और इसे द्रोह माना जाना चाहिए।
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