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मध्य-पूर्व संकट के बीच ईंधन की बढ़ती कीमतें, विपक्ष ने केंद्र सरकार पर किया हमला

मध्य-पूर्व संकट के बीच बढ़ीं ईंधन की कीमतें, विपक्ष ने केंद्र सरकार का किया घेराव

मध्य-पूर्व संकट के बीच ईंधन की बढ़ती कीमतें, विपक्ष ने केंद्र सरकार पर किया हमला

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही वृद्धि ने आम लोगों की आर्थिक स्थिति को और भी अधिक दबाव में डाल दिया है। इस बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे निशाने साध रहे हैं और इसे महंगाई की बढ़ती मार का प्रमुख कारण बता रहे हैं।

हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने बड़े पैमाने पर रैलियां और प्रचार अभियान चलाए, पर चुनाव परिणाम सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न संकट का हवाला देकर केंद्र सरकार ने ईंधन की कीमतों में लगातार इजाफा शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने चुनावी माहौल में महंगाई को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई, जबकि अब जनता को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि चुनाव के समय बड़ी आर्थिक चुनौतियों के विषय में सरकार ने खुलकर चर्चा नहीं की थी। चुनाव बाद ईंधन के दामों में वृद्धि ने सीधे तौर पर आमजन की परेशानी बढ़ाई है। पायलट ने कहा कि सरकार अस्थिर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का बहाना बनाकर लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा रही है, जिससे रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

पायलट ने यह भी विश्लेषण किया कि महंगे ईंधन के कारण ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ चुकी है, जिससे न केवल यात्रा महंगी हुई है बल्कि बाजार की तमाम अन्य वस्तुएं भी प्रभावित हो रही हैं। साथ ही, उन्होंने सरकार की तरफ से महंगाई नियंत्रण हेतु ठोस योजनाओं की कमी पर भी चिंता जताई।

अमूमन सड़क स्तर पर भी इस वृद्धि के विरोधाभासी प्रभाव सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बताया कि हर लगभग पांच-छह दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर आम जनता के आर्थिक बोझ को बढ़ा रहे हैं। उनके अनुसार, चुनाव के दौरान कीमतें स्थिर रखी जाती हैं लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, दामों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी होती है।

तृणमूल कांग्रेस के कुणाल घोष ने इसे ‘‘गंभीर स्थिति’’ बताया और कहा कि महंगाई का असर बजार की हर इकाई पर पड़ा है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें स्वतः ही ऊपर जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पार्टी इस वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है ताकि सरकार इस संकट को गंभीरता से स्वीकार करे।

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने महंगाई के साथ-साथ बिजली कटौती और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति आम लोग के लिए काफी कठिनाई उत्पन्न कर रही है।उन्होंने कहा कि इसी कारण विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है।

इस तरह, बढ़ती ईंधन कीमतों का प्रभाव न केवल आर्थिक रूप से आम आदमी को प्रभावित कर रहा है बल्कि राजनीतिक तनाव और सामाजिक असंतोष को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे केंद्र सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां उपस्थित हो गई हैं। सरकार पर अब दबाव है कि वह महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए और आम जनता को इस आर्थिक संकट से राहत प्रदान करे।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)