
दिन में उभरे श्रमिकों के असंतोष के बाद सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी। नए आदेश एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। अलग-अलग श्रेणियों में अधिकतम करीब 3000 तक का इजाफा हुआ है। यह तात्कालिक फैसला है। आगे व्यापक समीक्षा के साथ वेज बोर्ड के माध्यम से स्थायी समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी


जिले में प्रदर्शन के बीच दोपहर में इंटरनेट ठप हो गया। बाद में भी डाटा अपलोड और डाउनलोड की स्पीड धीमी रही। सेक्टर-58 में राहगीर मुकेश ने बताया कि वह रास्ते में फंसे थे। इंटरनेट बंद होने की वजह से मैप से रास्ता नहीं देख पा रहा थे।


काम ज्यादा कराते हैं, पर ओवरटाम नहीं देते
मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे तय 8 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम नहीं दिया जाता। महिला कर्मचारियों के लिए हालात बदतर है, उन्हें अपनी जगह से उठने नहीं दिया जाता है। यह अमानवीय है।इसे साथ ही बताया कि देहात और शहरी क्षेत्र में ही मजदूरी में अंतर है। एक मजदूर ने बताया कि गांवों में 500-600 रुपये रोज तक मिल जाते हैं, लेकिन नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक शहर में 300 रुपये पर काम करना पड़ता है। 20 हजार सैलरी की डिमांड पर अड़े कर्मचारी, फैक्ट्रियों में नहीं पहुंचे काम करने नोएडा में प्राइवेट कर्मचारियों का न्यूनतम सैलरी बढ़ाने को लेकर विरोध मंगलवार को भी जारी है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सैलरी बढ़ाने के बावजूद कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि 11,000 में गुजारा संभव नहीं और न्यूनतम सैलरी 20,000 होनी चाहिए. मांगे- महीने का वेतन कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये किया जाए।
- रोजाना की मजदूरी 600 रुपये तय की जाए।
- ओवरटाइम का पैसा दिया जाए।
- कंपनियां लिखित में भरोसा दें।

