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दिल्ली: आयोग ने कंपनी को दोषी ठहराया; रिफंड और ब्याज देने का आदेश सुनाया

ByAnkshree

Dec 22, 2025
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में रियल एस्टेट कंपनी टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह प्लॉट खरीदार विपिन बिहारी शर्मा को उनके द्वारा जमा किए गए पूरे पैसे ब्याज सहित लौटाए। 

आयोग की अध्यक्ष पूनम चौधरी, सदस्य बारिक अहमद और शेखर चंद्रा की पीठ ने कंपनी को शर्मा द्वारा जमा पूरा पैसा करीब 22 लाख रुपये 9 फीसदी साधारण ब्याज जमा की तारीख से रिफंड तक के साथ लौटाना होगा। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि अगर 45 दिन में नहीं लौटाया तो 12 फीसदी ब्याज लगेगा। वहीं, प्लॉट खरीदार को मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

आयोग ने पाया कि कंपनी ने कब्जा देने में भारी देरी की, जो सेवा में कमी है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। आयोग ने कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं। कहा कि कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि शर्मा रियल एस्टेट कारोबारी हैं। सिर्फ तीन प्लॉट बुक करने से कोई निवेशक नहीं बन जाता। आयोग ने पाया कि शर्मा का निवास दिल्ली में है, लेकिन प्लॉट सोनीपत में हैं, फिर भी यह व्यक्तिगत उपयोग के लिए हो सकते हैं। आयोग ने कहा कि कंपनी ने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं लिया देरी का उचित कारण नहीं बताया। 

कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शर्मा उपभोक्ता नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने तीन प्लॉट बुक किए थे। कंपनी का दावा था कि शर्मा रियल एस्टेट निवेशक हैं और प्लॉट लाभ कमाने के लिए खरीदे गए थे। कंपनी ने यह भी कहा कि शर्मा मूल खरीदार नहीं थे, बल्कि बाद में ट्रांसफर से प्लॉट मिले थे। कंपनी ने 19 मार्च 2019 को शर्मा को पत्र भेजकर वैकल्पिक प्लॉट चुनने को कहा था, क्योंकि मूल प्लॉटों में तकनीकी समस्या थी।

15 साल से अधिक समय तक भी नहीं मिले दो प्लॉट
यह मामला हरियाणा के सोनीपत में टीडीआई सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां शर्मा ने तीन प्लॉट बुक किए थे, लेकिन कंपनी ने दो प्लॉटों का कब्जा नहीं दिया। इस फैसले से उन हजारों खरीदारों को राहत मिल सकती है, जो रियल एस्टेट कंपनियों की देरी से परेशान हैं। इंद्रपुरी के रहने वाले विपिन बिहारी शर्मा ने 2006 में टीडीआई कंपनी के सोनीपत स्थित टीडीआई सिटी प्रोजेक्ट में तीन प्लॉट बुक किए थे। ये प्लॉट आवासीय थे और हर प्लॉट 250 वर्ग गज का था। शर्मा ने बताया कि उन्होंने ये प्लॉट अपने बच्चों के साथ रहने के लिए खरीदे थे। 15 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी दो प्लॉट नहीं मिले। वहीं, तीसरा प्लॉट कंपनी ने 2018 में दिया, लेकिन वह भी पांच साल की देरी से। 

प्लॉट बायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी नहीं किए
शर्मा ने शिकायत में कहा कि उन्होंने एक प्लॉट के लिए 9 लाख 73 हजार 750 रुपये देने थे, लेकिन उन्होंने 11 लाख 16 हजार 875 रुपये चुकाए। दूसरे प्लॉट के लिए 9 लाख 47 हजार 500 रुपये देने थे, उन्होंने 10 लाख 90 हजार रुपये दिए। कंपनी ने ज्यादा पैसे लिए, लेकिन न तो अतिरिक्त राशि लौटाई और न प्लॉट दिए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने प्लॉट बायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। शर्मा ने आयोग से मांग की कि कंपनी को 21% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज की दर से पैसे लौटाने का आदेश दिया जाए। 

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )