डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि अलग-अलग शिकायतों के आधार पर टीम जांच कर रही थी। जिसके दौरान टीम ने पंजाब के लुधियाना के भावेश गुप्ता और हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया। दोनों की आयु 21 वर्ष है। भावेश इंटरमीडिएट पास है और वह एक कंपनी में नौकरी करता है। हर्षित बीए का छात्र है और डिलीवरी ब्वाय का काम भी करता है। रुपये कमाने के चक्कर में दोनों आरोपी साइबर ठगों के संपर्क में आ गए। साइबर ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते थे और उनसे ऐंठी जाने वाली राशि को ट्रांसफर करने के लिए दोनों आरोपियों का अकाउंट इस्तेमाल होता था।
एक दो नहीं बल्कि कई मामलों में आरोपियों ने अपना खाता साइबर ठगों को दिया था। जिसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था। ठग स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसी तरह के एक मामले में आरोपियों ने ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराए थे जिसमें उन्होंने करीब सात लाख रुपये निकाले। इस मामले में पीड़ित एफसीआई से सेवानिवृत्त नोएडा के निवासी थे। आरोपियों को लगभग साढ़े चार लाख रुपयों का कमीशन मिला था।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी शिकायत : आरोपियों के पास से बरामद हुए मोबाइल से मिले विवरण से पुलिस को पता चला कि उनके खाते का उपयोग अलग-अलग राज्यों से की गई ठगी में प्रयुक्त हुआ है। इसमें तेलंगाना में दो और आंध्र प्रदेश में एक शिकायत दर्ज की गई है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी इनका गिराेह ठगी कर चुका है। साइबर ठगोंं के साथ दोनों आरोपी सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में आए थे।

