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नोएडा के Uniworld Gardens परियोजना में खरीदारों का 15 साल से लंबित फ्लैट कब्जा

Report By : ICN Network

नोएडा के सेक्टर 117 में स्थित Uniworld Gardens परियोजना के 200 से अधिक फ्लैट खरीदारों को 15 वर्षों से अपने फ्लैट का कब्जा नहीं मिल पाया है। बिल्डर ने फ्लैट बेच दिए थे, लेकिन निर्माण कार्य की प्रगति न के बराबर रही। खरीदारों ने सरकार और प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

इस परियोजना में फ्लैट खरीदारों की उम्मीदें अब टूटने लगी हैं, क्योंकि लंबे समय से निर्माण कार्य में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। खरीदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से फ्लैट खरीदे थे, लेकिन अब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल पाया है।

यह मामला रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी और खरीदारों के अधिकारों की अनदेखी का एक उदाहरण बन गया है। खरीदार अब न्याय की उम्मीद में हैं और सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील कर रहे हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}