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UP : मुज़फ्फर नगर की सारा खान के रील्स वीडियो ने पहुचायां साउथ फिल्म इंडस्ट्री तक, अपने टैलेंट से मचा रही धमाल

Report By : Sanjeev Kumar (Muzaffarnagar, UP)

Core Talent : हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की उस अदाकारा की जिसने बहुत कम समय और बहुत कम उम्र में बॉलीवुड की साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अचानक अपनी गहरी चाल के साथ एक अलग पहचान स्थापित की है वैसे तो जनपद मुजफ्फरनगर हमेशा चर्चाओं में रहा है लेकिन संगीत की दुनिया और फिल्म इंडस्ट्री में भी सदियों से अपनी एक अमुख पहचान बनाय हुए हैं !
दुनिया के चार संगीत घरानो में से एक कैराना घराना रहा है ।
जिसके फनकार अब्दुल करीम खान और अब्दुल शकूर खान दुनिया में अपना लोहा मनवाया वही उनके पोते अफजल कुरेशी और पर पोते प्रिंस साजिद माजिद और उनके परम शिष्य सदि के महान फनकार मोहम्मद रफी साहब ने अपनी अमुक छाप छोड़ी तो वही फिल्म इंडस्ट्री में हकीम केरानवी, मुंशी मुनक्का, ब्रजगोपाल वर्मा जैसे सदाबहार कलाकार दिए तो वही तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में सुपरस्टार रहे सलीम गौर व बॉलीवुड में आज के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक नवाज़ुद्दीनसिद्दीकी भी इसी जनपद से बिलॉन्ग करते हैं और अब जनपद मुजफ्फरनगर का नाम साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक नया नाम और जुड़ गया है वह है सारा खान।


सारा खान को बचपन से ही सिंगिंग और डांस का शौक रहा है जिसको अपने शुरुआती जीवन में स्कूल कार्यक्रमों में पूरा किया और जब स्मार्टफोन का जमाना आया तो अपनी ख्वाहिशों को टिकटोक युटुबूब और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का मौका मिला और यही से शुरू हुआ उनके करियर का सफर!


सारा खान का जन्म मुजफ्फरनगर के मिमलाना रोड पर एक शिक्षित एवं सामान्य परिवार में हुआ और उन्होंने इंग्लिश मीडियम की शिक्षा प्राप्त कर फिल्मी दुनिया में जाने का सपना सजाया जिसको पूरा करने में उनकी माता ने उनका साथ दियाऔर अब वह साउथ फिल्म इंडस्ट्री में कई नामचिन फिल्में कर चुकी है जिनमें मुख्य रूप से गहरी चाल में अचानक पुरी हो चुकी है और जल्द ही उनकी आगामी फिल्म “दुल्हन लेकर भाग गया” कि शूटिंग शुरू होने वाली हैसररा खान ने करीब दर्जन भर शर्टट मूवी और करीब तीन दर्जन सोंग्स भी कियाहैं और उनका सपना है कि वह दक्षिणी भारत की सुपरस्टार रही श्रीदेवी और बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित दिव्या भारती से भी ज्यादा अपनी प्रतिभा निखारकर अपनी एक अलग पहचान बनाएंगी।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}