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UP- सहारनपुर के वरिष्ठ सपा नेता चौधरी अब्दुल गफ़ूर का बयान,विपक्ष कमजोर नहीं मजबूती से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे

यूपी के सहारनपुर संवाददाता दीपांशु शर्मा ने सपा के वरिष्ठ नेता चौधरी अब्दुल गफूर से चुनाव को लेकर खास बातचीत की क्या कुछ कहा सुनिये उन्ही की जुबानी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद हुई तीन राज्यों मे जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी एक तरफ जहां खुशियां मना रही है , तो वहीं दूसरी तरफ सपा पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुट गई है ।

जिसको लेकर सपा के जिला उपाध्यक्ष अब्दुल गफूर का कहना था कि लोकतंत्र में यह सब चीज होती रहती हैं ।इससे ना तो विपक्ष कमजोर हुआ है ,ना ही चुप बैठा तो। इससे यह तो पता लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने जो मशीनों में गड़बड़ी करी है । इसका नतीजा 2024 के चुनाव में मिलने का काम होगा, साथ ही उनका कहना था कि पार्टी को प्रदर्शित करना माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का काम था । हार से हताश होने की जरूरत नहीं है । 2024 के चुनाव में जनता ही जवाब देगी भारतीय जनता पार्टी को ।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}