प्रदेश सरकार ने जीरो पॉवर्टी मिशन को और प्रभावी बनाने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इससे जोड़ने का फैसला किया है। इस पहल के तहत शिक्षण संस्थान जरूरतमंद परिवारों के सर्वांगीण विकास में सहयोग करेंगे, जबकि छात्र स्वयंसेवक (वॉलंटियर) के रूप में गांवों में काम करेंगे। योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राजधानी लखनऊ से होगी, जहां शिक्षण संस्थान अपनी नजदीकी 10 से 15 ग्राम पंचायतों को गोद लेंगे।
आगरा जिले में जीरो पॉवर्टी योजना के तहत 690 ग्राम पंचायतों में करीब 18 हजार ऐसे परिवारों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया था। योजना के शुरुआती चरण में आठ विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई। चिह्नित परिवारों का डाटा संबंधित विभागों को दिया गया, जहां सत्यापन के बाद पात्र लाभार्थियों का चयन किया गया।
इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं का लाभ देना शुरू किया गया। सभी विभाग समय-समय पर इन परिवारों की प्रगति की समीक्षा करते हैं। अब कॉलेज और विश्वविद्यालयों के जुड़ने से इन परिवारों को गरीबी से बाहर निकालकर मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी।
जिला पंचायतराज अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे के जरिए परिवारों की पहचान की गई है। संबंधित विभाग अपनी-अपनी योजनाओं से उन्हें लाभान्वित कर रहे हैं। पंचायत विभाग ने शौचालय निर्माण के लिए 1,800 परिवारों का चयन किया था, जिनमें से 700 को लाभ मिल चुका है, जबकि शेष को जल्द लाभ दिया जाएगा।
जीरो पॉवर्टी योजना में चयनित परिवारों को आयुष्मान कार्ड, आवास योजना, श्रमिक कार्ड, राशन कार्ड, किसान सम्मान निधि, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।