दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित गुंडागर्दी और अदालती आदेशों के उल्लंघन की घटनाओं पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि उसे संतुष्टि नहीं हुई कि इस तरह का आचरण दोबारा नहीं होगा, तो वह चुनावों को पूरी तरह रद्द कर सकती है।मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि ‘अब बहुत हो चुका। हम इस तरह के आपराधिक व्यवहार, आपराधिक आचरण, लापरवाही और गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं कर सकते।’ अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं हर साल हो रही हैं। पीठ ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, ‘हम चुनाव छोड़ देंगे और जब तक हमें संतुष्टि नहीं हो जाती कि इस तरह की कोई गुंडागर्दी नहीं होगी, तब तक हम चुनाव की अनुमति नहीं देंगे।
‘दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता मोहिंदर रूपल ने अदालत को बताया कि बुधवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया था। हालांकि, पीठ ने कथित उल्लंघनों को दर्शाने वाली तस्वीरों को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। अदालत ने कहा, ‘क्या आपने तस्वीरें देखी हैं? यह आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।’प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवालअदालत ने सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय का स्थिति और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण है। पीठ ने कहा कि यदि अधिकारी स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते या अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कर सकते, तो उन्हें ऐसा बता देना चाहिए। इसके बाद अदालत चुनाव छोड़ने पर विचार करेगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि वह अदालत से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कथित आचरण को “पूरी तरह निंदनीय” बताया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।उम्मीदवारों के नाम वाली कारों पर सवालसुनवाई के दौरान डूसू उम्मीदवारों के नाम और लेबल वाली कारों की तस्वीरों को देखते हुए पीठ ने सवाल किया कि उम्मीदवार कथित प्रचार से खुद को कैसे अलग कर सकते हैं। पीठ ने कहा, ‘कारों पर उम्मीदवारों के नाम और लेबल लगे हैं।
आप कैसे कह सकते हैं कि वे उनका प्रचार नहीं कर रहे हैं? इस दुनिया में कौन उम्मीदवार के समर्थन के बिना उसका प्रचार करेगा?’ पीठ ने विशेष रूप से उन तस्वीरों का भी उल्लेख किया, जिनमें कारों पर उम्मीदवारों के नाम दिखाई दे रहे थे। एएसजी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी छात्र संगठनों को नोटिस जारी करने का सुझाव भी दिया।

