कोयम्बटूर, तमिलनाडु – एक ताजा शोध में पश्चिमी घाटों में पाए जाने वाले हरे रंग के गोली मिलिपीड (millipede) की स्व-सफाई क्षमता के पीछे के कारणों का पता चला है। इस अध्ययन में यह साबित हुआ है कि इस मिलिपीड की बाह्य कंकाल संरचना में अत्याधुनिक जल-विकर्षक (हाइड्रोफ़ोबिक) गुण होते हैं, जो इसे स्वच्छ और सूखा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि मिलिपीड का एक्सोस्केलेटन (बाहरी कंकाल) अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर जल को विकर्षित करता है, जिससे पानी और कीचड़ इसके शरीर पर जमा नहीं हो पाते। यह प्राकृतिक तंत्र न केवल मिलिपीड को बीमारी और संक्रमण से बचाता है, बल्कि इसे सड़कों और पत्तियों की गीली सतह पर भी स्वतंत्र रूप से चलने में सहायता करता है।
शोध के प्रमुख, डॉ. आर. वेणु ने कहा, “पश्चिमी घाटों की नमी भरी जलवायु में हरे गोली मिलिपीड का यह अनोखा जल विकर्षक गुण पर्यावरण के अनुसार उसकी सुरक्षा और सफाई के लिए विकसित हुआ है। इस प्राकृतिक तंत्र का अध्ययन जीव विज्ञान और सामग्री विज्ञान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।”
इस अध्ययन के परिणामों से बायोमिमेटिक्स (प्राकृतिक तंत्रों की नकल कर प्रौद्योगिकी विकसित करना) क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। प्राकृतिक जल विकर्षक सतहों के जैसे मॉडल विकसित करके सफाई से जुड़े उपकरणों और उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है। यह पर्यावरण के अनुकूल और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।
पश्चिमी घाट विश्व धरोहर क्षेत्र में जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र माना जाता है और यहां पाए जाने वाले जीव-विकास तंत्र पर अध्ययन करने से न केवल वन्यजीवन संरक्षण में मदद मिलती है, बल्कि नए वैज्ञानिक आविष्कारों के द्वार भी खुलते हैं। इस शोध ने भी इस बात को मजबूती प्रदान की है कि प्राकृतिक जीव-जंतुओं का अध्ययन हमारी तकनीकी प्रगति के लिए अत्यंत जरूरी है।
संक्षेप में कहा जाए तो, हरे गोली मिलिपीड की जल-विकर्षक विशेषता उसकी स्व-सफाई क्षमता को उत्कृष्ट बनाती है, जो उसे नमी वाले पर्यावरण में जीवित और स्वस्थ रहने में मदद करती है। ऐसी प्राकृतिकी स्थितियों का अध्ययन न केवल जीव विज्ञान में बल्कि तकनीकी नवाचारों में भी उपयोगी सिद्ध होगा।