मुंबई में निर्माण और ध्वंस मलबे के अवैध निपटान पर चिंताएं तेज
भाजपा विधायक अमीत सताम ने मुंबई शहर में निर्माण और ध्वंस (C&D) मलबे के बढ़ते अवैध निपटान को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने ब्रिहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) से इस समस्या के समाधान हेतु एक प्रभावी और समग्र नीति लागू करने की मांग की है। सताम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मुंबई के तटीय पारिस्थितिक तंत्र और जल निकासी संरचनाओं की सुरक्षा के लिए भी सुधार आवश्यक हैं।
विधायक अमीत सताम ने महापौर रितु तावड़े और आयुक्त अश्विनी भिड़े को लिखे पत्र में बताया कि मुंबई में प्रतिदिन लगभग 8,000 मीट्रिक टन निर्माण और ध्वंस मलबा उत्पन्न होता है, जिसमें से अधिकांश मलबा कमजोर प्रवर्तन के कारण अवैध रूप से निपटाया जाता है।
उन्होंने आगाह किया कि यह मलबा नालों, मैंग्रोव क्षेत्र, खाड़ियों और खुले स्थानों में फेंका जा रहा है, जिससे न केवल बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
अमित सताम ने इस समस्या से निपटने के लिए तकनीक आधारित प्रणाली अपनाने की मांग की है, जिसमें मलबे का जीपीएस ट्रैकिंग, परियोजनाओं का अनिवार्य पंजीकरण, पुनर्चक्रण संयंत्र, और उल्लंघनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल हो। उन्होंने दिल्ली के डिजिटल मलबा पोर्टल को प्रभावी पारदर्शिता और प्रवर्तन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
दिल्ली मॉडल को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया
दिल्ली के मलबा पोर्टल का संदर्भ देते हुए, सताम ने बताया कि यह प्रणाली परियोजनाओं के पंजीकरण, वास्तविक समय में ट्रैकिंग और नागरिक शिकायत तंत्र की सुविधा प्रदान करती है, जिससे पारदर्शिता और कार्यान्वयन बेहतर होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई के शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए दिल्ली मॉडल की तर्ज पर डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
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