मध्य प्रदेश में वंदे मातरम गाने से इनकार पर दो मुस्लिम कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान ‘‘वंदे मातरम’’ गीत गाने से इनकार करने पर दो मुस्लिम कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह घटना पिछले सप्ताह हुई और पुलिस ने इसे समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया है।
पुलिस ने बताया कि भाजपा पार्षदों की शिकायत के बाद मामला भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत दर्ज किया गया है जो धार्मिक, जातीय और जन्मस्थान के आधार पर दुष्प्रचार और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाले कृत्यों को रोकती हैं।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राम स्नेही मिश्रा ने बताया कि रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने राष्ट्रीय गीत के प्रति अनादर किया है। जांच में यह भी पाया गया कि इस घटना ने सामाजिक व धार्मिक सौहार्द को प्रभावित करते हुए मतभेदों को जन्म दिया है।
यह घटना 8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र में हुई जब ‘‘वंदे मातरम’’ गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। फौजिया शेख अलीम ने सवाल उठाया कि क्या किसी नियम या कानून के तहत इस गीत को गाना अनिवार्य है और इसके बाद वे हाउस से निकल गईं। वहीं, रुबीना इकबाल खान ने सत्र के दौरान कहा कि उनके धार्मिक विश्वास के अनुसार इस गीत का गायन संभव नहीं है।
इस विवाद के दौरान भाजपा सदस्यों ने जमकर विरोध जताया और कहा, ‘‘अगर भारत में रहना है तो ‘वंदे मातरम’ कहना पड़ेगा।’’ यह बयान हंगामे का कारण बना।
इस मामले ने सामाजिक और राजनीतिक बहस को भड़का दिया है, जिसमें देशभक्ति के प्रतीकों और व्यक्तिगत धार्मिक आस्था के बीच संतुलन की प्रश्न उठाई गई है। प्रशासन का दावा है कि किसी भी प्रकार का विरोध अगर समाजिक सौहार्द को प्रभावित करता है तो उस पर कार्रवाई होगी।
यह पहल राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां एक ओर देशभक्ति के प्रतीकों का सम्मान जरूरी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर धर्म, आस्था और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान भी समता के आधार पर होना चाहिए।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आगे के निर्णय समाज और कानून के दायरे में अपेक्षित हैं।