महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के बचाव में पीएम मोदी का प्रतिबद्धता पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आरोप लगाया कि विपक्षी दल महिला आरक्षण बिल के खिलाफ अपने ‘स्वार्थी राजनीतिक हितों’ के कारण खड़े हुए हैं। उनका यह कथन इस बिल के लोकसभा में असफल होने के एक दिन बाद आया, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में संशोधन प्रस्तावित थे।
मोदी ने कहा कि संविधान निर्माताओं का अपमान करके विपक्ष ने महिला सशक्तिकरण के खिलाफ काम किया है। उन्होंने कहा, “हमने उम्मीद की थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी भूल को सुधारते हुए महिला आरक्षण का समर्थन करेगी। लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का अवसर गंवा दिया।”
संसद में पारित न होने वाले बिल में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनः परिसीमन शामिल था। कांग्रेस, डॉ. एम. करुणानिधि की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, और तृणमूल कांग्रेस ने आरक्षण के पक्ष में समर्थन जताया, लेकिन परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग महिलाओं की शक्ति को हल्के में ले रहे हैं, वे 21वीं सदी की जागरूक महिलाओं की समझ और दृष्टि को भूल गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाएं देश के हर नए बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं और विपक्षी दलों की नीयत को पहचानती हैं।
मोदी ने चेतावनी दी कि जिन विपक्षी दलों ने अब तक महिला अधिकारों के लिए समर्थन नहीं दिया, वे जनता के निर्णय का सामना करेंगे। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को अभूतपूर्व प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया और कहा कि यह सरकार महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह प्रस्तावित संशोधन इसीलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह न केवल महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा, बल्कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से चुनावी प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने का प्रयास करता। हालांकि, क्षेत्रीय दलों के विरोध और राजनीतिक रणनीतियों के कारण बिल लोकसभा में असफल रहा।
इस घटना ने महिला आरक्षण और चुनावी सुधारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों की कट्टरता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों को लागू करना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जो महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र की संरचना को भी नियंत्रित करेगा।