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एक उपन्यासकार का जवाब: ‘प्रवासी (भारतीय) लेखकों की संवेदनाओं का मानचित्रण करना अधिक रोचक’

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Apr 18, 2026
A novelist responds: ‘More interesting to map the sensibilities of diasporic (Indian) writers’

विदेशों में बसे भारतीय लेखकों की संवेदनाओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण

हालिया लेख “क्यों लगभग हर प्रमुख भारतीय लेखक विदेश में रहते हैं और इसका भारतीय कविता पर क्या प्रभाव पड़ा है” ने भारतीय साहित्य पर विदेशों में बसे लेखकों के प्रभाव पर चर्चा की। इसमें कहा गया है कि इन लेखकों की विदेश में उपस्थिति ने भारतीयता की सच्ची छवि को छोड़कर पश्चिमी पाठकों के लिए अधिक व्याख्यायित भारत प्रस्तुत किया है। इस दृष्टिकोण पर प्रतिक्रिया करना आवश्यक है।

प्राथमिकताएं बदलें

सबसे पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि विदेशों में बसे लेखकों की प्रमुखता को कम करने के लिए भारत में रहने वाले भारतीय लेखकों को मीडिया में उचित स्थान दिया जाना चाहिए। वर्तमान भारतीय मीडिया साहित्य को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है। जिस वेबसाइट पर यह लेख प्रकाशित हुआ है, वह एक बड़े अंग्रेजी अखबार से जुड़ी है जिसने दशकों से कथा साहित्य की समीक्षा बंद कर रखी है। जिन मीडिया संस्थानों के पास कथा साहित्य के लिए जगह होती है, वे भी सीमित संसाधनों को मुख्यतः लोकप्रिय पुस्तकों पर खर्च करते हैं।

इस स्थिति में भारतीय साहित्य की सशक्त प्रस्तुति के लिए जरूरी है कि स्थानीय लेखकों को मीडिया की प्राथमिकता मिले और साहित्य की विविध आवाजों का समावेश हो। यह कदम न केवल साहित्य जगत की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा बल्कि पाठकों को अधिक सटीक और बहुआयामी दृष्टिकोण प्राप्त होगा।

परिणामस्वरूप, भारतीय साहित्य में विविधता और भारतीय संदर्भों की पहचान बनी रहेगी तथा प्रवासी लेखक किसी एक विशेष नजरिए को लेकर साहित्य को प्रभावित करते हुए इसका दायरा दूर्निहित नहीं करेंगे।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)