यह मामला हरियाणा के सोनीपत में टीडीआई सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां शर्मा ने तीन प्लॉट बुक किए थे, लेकिन कंपनी ने दो प्लॉटों का कब्जा नहीं दिया। इस फैसले से उन हजारों खरीदारों को राहत मिल सकती है, जो रियल एस्टेट कंपनियों की देरी से परेशान हैं। इंद्रपुरी के रहने वाले विपिन बिहारी शर्मा ने 2006 में टीडीआई कंपनी के सोनीपत स्थित टीडीआई सिटी प्रोजेक्ट में तीन प्लॉट बुक किए थे। ये प्लॉट आवासीय थे और हर प्लॉट 250 वर्ग गज का था। शर्मा ने बताया कि उन्होंने ये प्लॉट अपने बच्चों के साथ रहने के लिए खरीदे थे। 15 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी दो प्लॉट नहीं मिले। वहीं, तीसरा प्लॉट कंपनी ने 2018 में दिया, लेकिन वह भी पांच साल की देरी से। प्लॉट बायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी नहीं किए
शर्मा ने शिकायत में कहा कि उन्होंने एक प्लॉट के लिए 9 लाख 73 हजार 750 रुपये देने थे, लेकिन उन्होंने 11 लाख 16 हजार 875 रुपये चुकाए। दूसरे प्लॉट के लिए 9 लाख 47 हजार 500 रुपये देने थे, उन्होंने 10 लाख 90 हजार रुपये दिए। कंपनी ने ज्यादा पैसे लिए, लेकिन न तो अतिरिक्त राशि लौटाई और न प्लॉट दिए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने प्लॉट बायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। शर्मा ने आयोग से मांग की कि कंपनी को 21% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज की दर से पैसे लौटाने का आदेश दिया जाए।

