अध्ययन में अक्तूबर और नवंबर को “अर्ली विंटर” अवधि के रूप में देखा गया है, जब खेतों में आग का प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले दिसंबर को “पोस्ट-फार्म फायर” चरण माना गया, जब पराली जलाने का असर लगभग नगण्य हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में पूरे एनसीआर में फैला स्मॉग न सिर्फ व्यापक था, बल्कि पराली जलाने वाले महीनों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली की हवा में मौजूद पीएम 2.5 का पूरा बोझ सिर्फ राजधानी से नहीं आ रहा। 1 से 15 दिसंबर के बीच दिल्ली का योगदान कुल पीएम 2.5 में सिर्फ 35 प्रतिशत रहा, जबकि 65 प्रतिशत प्रदूषण आसपास के एनसीआर जिलों और उससे भी दूर के इलाकों से आया। यह आंकड़ा साफ करता है कि समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।
दिल्ली: प्रदूषण पर नई रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
अध्ययन में अक्तूबर और नवंबर को “अर्ली विंटर” अवधि के रूप में देखा गया है, जब खेतों में आग का प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले दिसंबर को “पोस्ट-फार्म फायर” चरण माना गया, जब पराली जलाने का असर लगभग नगण्य हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में पूरे एनसीआर में फैला स्मॉग न सिर्फ व्यापक था, बल्कि पराली जलाने वाले महीनों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली की हवा में मौजूद पीएम 2.5 का पूरा बोझ सिर्फ राजधानी से नहीं आ रहा। 1 से 15 दिसंबर के बीच दिल्ली का योगदान कुल पीएम 2.5 में सिर्फ 35 प्रतिशत रहा, जबकि 65 प्रतिशत प्रदूषण आसपास के एनसीआर जिलों और उससे भी दूर के इलाकों से आया। यह आंकड़ा साफ करता है कि समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।

