सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया और कई वर्षों बाद अचानक कार्रवाई शुरू की, जो लापरवाही को दर्शाता है। अदालत ने इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को निर्देश दिया था कि वे अनिल अंबानी और आरकॉम के खिलाफ किसी भी तरह की मौजूदा या भविष्य की कार्रवाई पर रोक लगाएं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जिस फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर खातों को फ्रॉड घोषित किया गया, उसमें कानूनी खामियां हैं और वह आरबीआई के नियमों के अनुरूप नहीं है। इसके खिलाफ बैंकों ने डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया है।
सोमवार को यह मामला मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए पेश हुआ। बैंकों ने दलील दी कि फॉरेंसिक ऑडिट पूरी तरह वैध है और इसमें धन की हेराफेरी व गलत उपयोग से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं, जो ऑडिट फर्म की रिपोर्ट में दर्ज हैं।
बैंकों का कहना है कि अनिल अंबानी ने सिंगल बेंच में फॉरेंसिक ऑडिट को केवल तकनीकी आधार पर चुनौती दी थी। अपील में उन्होंने डिवीजन बेंच से अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की है, यह कहते हुए कि वह आदेश तथ्यों के विपरीत है।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय की है। इससे पहले अनिल अंबानी ने बैंकों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को सिंगल बेंच में चुनौती दी थी, जिनमें उनके और आरकॉम के खातों को फ्रॉड घोषित करने का प्रस्ताव था।
अनिल अंबानी ने अंतरिम राहत की मांग करते हुए इन नोटिसों पर रोक लगाने और किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई न करने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि फॉरेंसिक ऑडिट करने वाली फर्म इसके लिए योग्य नहीं है और रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं था। सिंगल बेंच ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

