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गुरुग्राम: घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए 200 गाड़ियों का और होगा टेंडर

नगर निगम की ओर से चारों जोन में घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था अभी पटरी पर आने में समय लगेगा। चारों जोन में पिछले कई महीने से शहर की कूड़ा उठान व्यवस्था प्रभावित थी। नई व्यवस्था के तहत चारों जोन में 9.59 करोड़ का टेंडर आवंटित किया गया है। इसमें लगी 400 गाड़ियों से हालात काबू में नहीं आ रहे हैं। नगर निगम ने हर जोन में 50 गाड़ियां बढ़ाने का फैसला किया है। फरवरी में घर-घर से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की संख्या 600 हो जाएगी।

जून 2025 से इसी तरह के टेंडर लग रहे हैं। अब दूसरी बार छह माह की अवधि के टेंडर लगाकर एजेंसियों को काम सौंपा गया है। छोटी एजेंसियां काम करने में सक्षम नहीं है और न इनके पास पूरे संसाधन हैं। हालांकि, निगम ने 315 करोड़ रुपये के स्थायी टेंडर की तैयारी की है और इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी मुख्यालय से मांगी गई है। मंजूरी मिलने के बाद नया टेंडर जारी किया जाएगा, लेकिन तब तक शहर की सफाई व्यवस्था एक चार फिर अस्थायी भरोसे पर टिकी रहेगी।

कुछ प्वाइंट पर आ रही है परेशानी
नगर निगम की कई कॉलोनी में पुरानी गाड़ी से अभी भी कूड़ा उठाया जा रहा है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नई एजेंसी में नहीं मर्ज हो रही है। कारण गाड़ी चालक को एजेंसी के हिसाब से चलना होगा। केंद्र सरकार की नमस्ते योजना का हवाला देकर ऐसे लोग अभी भी डटे हुए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही ऐसी कालोनी में भी कूड़ा उठान की व्यवस्था तय की जाएगी।

चार जोन में की गई यह व्यवस्था..
: जोन-एक: बीआर एड कंपनी को 115 वाहनों के साथ जिम्मेदारी दी गई है, जिस पर छह माह में करीब 3.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
: जोन-2: आर्मी डेकोरेटर्स 101 वाहनों से कूड़ा उठाएगी और इस पर लगभग 2.68 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
: जोन-3: क्लासिक मैनपावर एंड कंस्ट्रक्शन सर्विसेज 86 वाहनों के साथ काम करेगी, जिस पर 1.81 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आएगा।
: जोन-4: बालाजी मैनपावर सर्विसेज, फरीदाबाद को 98 वाहनों के साथ ठेका दिया गया है, जिसकी लागत करीब 2.07 करोड रुपये है।
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1,200 टन कूड़ा शहर से प्रतिदिन निकलता है।
900 से 1,000 टन कूड़ा फरीदाबाद से रोजाना बंधवाड़ी पहुंच रहा है।

सफाई व्यवस्था और बिगड़ रही है। सूखा और गीला कूड़ा अलग करने की व्यवस्था नहीं होने से सारा मिश्रित कूड़ा सीधे बंधवाड़ी लैंडफिल पहुंच रहा है। व

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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