दूसरे चरण के तहत वेस्टर्न रेलवे के कई प्रमुख स्टेशनों पर व्यापक स्तर पर बदलाव किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों और सबअर्बन लोकल ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग ट्रैकों पर करना है, जिससे लोकल ट्रेन सेवाएं अधिक सुचारू हो सकें और यात्रियों को राहत मिले।
इस योजना के तहत सबअर्बन लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए अलग ट्रैक तैयार किए जाएंगे। करीब 26 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में दहिसर, भयंदर, नायगांव और विरार जैसे स्टेशनों के लेआउट में बदलाव किया जाएगा और कुछ स्टेशनों को आंशिक रूप से शिफ्ट भी किया जाएगा।
नई पटरियों के अनुरूप स्लो लाइनों के प्लेटफॉर्म में भी बदलाव होंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 2184 करोड़ रुपये है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बोरीवली से विरार तक मौजूदा मेन लाइनों के पश्चिमी हिस्से में दो नई रेल लाइनें विकसित की जाएंगी।
निर्माण कार्य के दौरान तीन बड़े पुल, 16 छोटे पुल, एक अंडरपास और दो प्रमुख ब्रिज बनाए जाएंगे। वसई क्रीक पर स्थित ब्रिज नंबर 73 और 74 का विशेष रूप से विकास किया जा रहा है। ब्रिज नंबर 73 की नींव का काम शुरू हो चुका है, जबकि भयंदर के पास स्थित एक पुराने ऐतिहासिक पुल को हटाया जा रहा है।
भयंदर और वसई स्टेशनों का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण किया जाएगा, जिसमें नए प्लेटफॉर्म बनाना और मौजूदा प्लेटफॉर्म का पुनः उपयोग शामिल है। इसके अलावा दहिसर, मीरा रोड, नायगांव और नालासोपारा जैसे अन्य स्टेशनों को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जाएगा।
परियोजना के तहत दहिसर स्टेशन के प्लेटफॉर्म को उत्तर दिशा में, भयंदर को पश्चिम की ओर और विरार स्टेशन को थोड़ा दक्षिण की ओर शिफ्ट करने की योजना है। इन बदलावों के पूरा होने के बाद मुंबईकरों को रेल यात्रा में बेहतर सुविधा और कम भीड़ का अनुभव मिलेगा।

