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डाकिया पासपोर्ट लेकर आया… लेकिन घर में रहता कोई नहीं, एक ही पते से निकले 22 पासपोर्ट!

गाजियाबाद में फर्जी पते के जरिए एक ही एड्रेस पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी कराने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक डाकिया समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। खुलासा हुआ है कि पासपोर्ट की डिलीवरी के बदले 2,000 रुपये लिए जाते थे। जांच की शुरुआत दिल्ली पासपोर्ट कार्यालय की शिकायत के बाद हुई और अब इस पूरे नेटवर्क के तार काफी दूर तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

दरअसल, मामला तब सामने आया जब पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने गाजियाबाद पुलिस को पत्र लिखकर कुछ आवेदनों को संदिग्ध बताया। शिकायत में कहा गया कि एक ही पते पर बार-बार पासपोर्ट जारी हो रहे हैं और हर आवेदन में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया है। पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज में इस तरह की समानता ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया।

जांच के दौरान पुलिस जब दिए गए पतों पर पहुंची, तो वहां कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जिसके नाम पर पासपोर्ट जारी हुए थे। न तो उन लोगों के रहने के सबूत मिले और न ही आसपास किसी को उनके बारे में जानकारी थी। ग्रामीण क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र नाथ तिवारी के मुताबिक, सभी पते पूरी तरह फर्जी पाए गए।

जांच आगे बढ़ी तो स्थानीय डाकघर में तैनात डाकिया अरुण कुमार की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार हर पासपोर्ट के बदले 2,000 रुपये लेकर दस्तावेज तय पते पर पहुंचाने के बजाय सीधे गिरोह के सदस्यों को सौंप देता था। यानी डिलीवरी की आखिरी और अहम कड़ी भी गिरोह के कब्जे में थी।

पूछताछ में अरुण कुमार ने बताया कि करीब पांच महीने पहले प्रकाश सुब्बा और विवेक नाम के दो लोग उसके संपर्क में आए थे। उन्होंने हर पासपोर्ट के बदले 2,000 रुपये देने का प्रस्ताव रखा था। शुरुआत में उसे यह आसान काम लगा और धीरे-धीरे वह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया। इसी मिलीभगत से एक ही पते पर दर्जनों पासपोर्ट जारी होते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी।

इस मामले में एक महिला समेत कुल 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके नाम पर पासपोर्ट बनवाए गए और वे भी जिन्होंने पूरे फर्जीवाड़े में मदद की। अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल अवैध यात्रा, मानव तस्करी, आर्थिक अपराध या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी किया जा सकता है। इसी वजह से जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

इस खुलासे ने पासपोर्ट सत्यापन और डिलीवरी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही पते पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी हो जाना सिस्टम की बड़ी चूक मानी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने पासपोर्ट जारी हुए और उनका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। साथ ही गिरोह के मास्टरमाइंड और नेटवर्क की पहुंच का भी पता लगाया जा रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)